समाज कार्य ज्ञान के स्वदेशीकरण के सांकेतिक विचार - Indicative Ideas for Indigenization of Social Work Knowledge
समाज कार्य ज्ञान के स्वदेशीकरण के सांकेतिक विचार - Indicative Ideas for Indigenization of Social Work Knowledge
सार्वभौमिकता से परिवर्तित सांस्कृतिक संदर्भों के विचारों से निकाले गए समाज कार्य ज्ञान व दक्षता की। मुख्य अवधारणों को स्वीकार करने के प्रयासों की संभावनाओं को जटिलताओं एवं संवेदनशीलता संबंधी धारणाओं द्वारा चुनौती प्रदान की ई वैश्विक मानको या मानदण्डों के चारित्रिक गुणों का निर्माण उदारता, संतुलित मानव अधिकार संबंधित ऐतिहासिक संदर्भ में सामाजिक न्याय सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़े विशिष्ट परिवेशों में हुआ है। राष्ट्र से संबंधित एवं राष्ट्रीय संदर्भ से भिन्न संवादों की निरंतरता को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इतनी गंभीरता से ध्यान दिए जाने के बावजूद भी व्यक्ति या किसी वर्ग की आवश्यकताओं के संदर्भ में गलत अर्थ निकाले जाने का जोखिम बहुत बड़ा हो सकता है, यदि सामाजिक कार्यकर्ता उस व्यक्ति वर्ग या सामाजिक समूह की पृष्ठभूमि के बारे में नहीं जानता। मानकों के फुटनोट में इसके बारे में स्पष्ट कहा गया है कि जब सांस्कृतिक संवेदनशीलता सांस्कृतिक योग्यता पर आधारित क्रिया कलापों में सहयोग करती है तब स्कूलों को निश्चित तौर पर उन संभावनाओं के प्रति सचेत रहना चाहिए जोसमूह के परिवर्तनीय विचार को सुद्द बनाते हैं। स्कूल को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाजकार्य के विद्यार्थी किसी व्यक्ति विशेष के विचार या अनुभव को पूरे समूह के लिए उपयुक्त न समझें स्कूल को स उभयनिष्ठों एवं अंतर्सामूहिक असमनाओं तथा समानताओं पर विशेश्वोर से ध्यान देना चाहिए।
जब सामाजिक कार्यकर्ता विपरीत परिस्थिति में जीवन यापन करने वाले लोगों को सशक्त करना चाहता है उस समय ये मुद्दे विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाते है। सामाजिक कार्यकर्ता ऐसे लोगों के नैतिक पारंपरिक एवं सांस्कृतिक मुद्दों को किस अर्थों में समझता है तथा इनके जरूरतों के प्रति किस प्रकार की। प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। विश्वव्यापी समाजकार्य शिक्षा मानक भी यह आश्वासन नहीं दे पाता है कि यह पूर्णत: सही मार्ग दर्शन एवं स्थिर व्यवहार उपलब्ध करा सकता है।
डोमीनेली का इस संदर्भ में कहना है कि छोटी-छोटी भिन्नताएं जैसे प्रयोग की भाषाओं में बहुत मौलिक या सूक्ष्म अंतर होता है। यह छोटा या मामूली अंतर भी संस्कृति के अंतर्गत निहित तथा संस्कृति से भिन्न आपसी संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता हैं अतः दूसरे की इच्छा एवं आवश्यकताओं को स्पष्ट रूप से नहीं जाना जा सकता। अंततः हम कह सकते हैं कि समाज कार्य के प्रत्येक शिक्षक एवं विद्यार्थियों की प्रत्येक मामलों एवं परिवेशों को ध्यान में रखकर उस पर विचार करते हुए अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझना चाहिए तथा अपनी योग्यता व क्षमता के मुताबिक प्रत्येक मामलों में उचित कार्यवाही करनी चाहिए।
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