मनोरंजनात्मक एवं शिक्षात्मक कार्यक्रम - Recreational and Educational Programs
मनोरंजनात्मक एवं शिक्षात्मक कार्यक्रम - Recreational and Educational Programs
इसके संदर्भ में प्रौढ़ शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा को अधिक महत्व दिया गया। 1866 में इसी तारतम्य में पहले खेल मैदान का निर्माण किया गया, जो बालक बालिकाओं के लिए उनके मनोरंजन एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहायक हो सके। इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए 1885 में राष्ट्रीय स्तर पर इसे प्रारंभ किया गया। आगे चलकर इन्हीं कार्यक्रमों के अंतर्गत खेलकूद व शारीरिक क्रियाओं को भी शामिल किया गया, जिसमें करता संगीत, अभिनय, नृत्य आदि थे।
शिक्षा के कार्यक्रम के अंतर्गत प्रौढ़ शिक्षा को अधिक महत्व प्रदान करने के लिए 1870 एवं 1880 के मध्य प्रौढ़ शिक्षा आंदोलन भी चलाया गया। इस आंदोलन का यह परिणाम निकला कि सार्वजनिक पुस्तकालयों एवं विश्वविद्यालयों में निःशुल्क प्रसार सेवाऍप्रारंभ व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम युवकों के व्यवहार में परिवर्तन हेतु कई प्रकार के मनोरंजनात्मक कार्यक्रमों तथा शिक्षात्मक कार्यक्रमों को शामिल किया गया, जिससे युवकों के चरित्र का निर्माण हो सके। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हेतु 1875 से 1895 के मध्य बड़े प्रोटेस्टेन्ट समुदाय ने अपना युवक कार्यक्रम संगठित किया। धार्मिक भावनाओं के विकास के साथ-साथ चरित्र निर्माण एवं व्यवहार निर्माण के लिए भी बॉयज स्काउट गर्ल्स स्काउट, कम्फायर गर्ल्स आदि संगठनों का विकास हुआ। इस प्रकार की और अन्य संस्थाओं ने भी इस बातपर जोर दिया कि व्यक्ति का समुदाय तथा सामाजिक परिस्थितियों से संबंध होता है जो कि उसके व्यवहार को प्रभावित करती है। अतः इन्हीं उद्देश्यों के साथ उपर्युक्त व्यवहार एवं चरित्र निर्माण कार्यक्रमों को संचालित किया जाता था।
उपचार के क्षेत्र में मनोरंजनात्मक कार्यक्रम किसी भी बीमारी के क्षेत्र में व्यक्ति का - वातावरण प्रमुख भूमिका निभाता है। अत इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उपचार के क्षेत्र में मनोरंजन कार्यक्रमों को भी शामिल किया गया। ये कार्यक्रम व्यक्ति को शारीरिक मानसिक तथा सांवेगिक व्याधियों से मुक्ति दिलाने या प्रभाव को कम करने का प्रयास करते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से हृदय रोग, तनाव ग्रस्त बच्चे, मानसिक रोगी बाल अपराधी आदि क्षेत्रों में मनोरंजन उपचार के साथ इसका प्रयोग किया जाता था। वर्तमान समय में इस क्रियाविधि का उपयोग अस्पतालों में मुख्य रूप से किया जाने लगा है, जिसमें अनेक गतिविधियों के माध्यम से व्यक्ति के सामूहिक संबंधों को दृढ़ता प्रदान होती है जिससे रोगों का निदान करने में आसानी होती है।
अन्य कार्यक्रम समाज कार्य के क्षेत्र में ऐसे कई संगठन है जिसके माध्यम से सामूहिक गतिविधियों को कराया जाता है। जैसे राजनीतिक पार्टियाँ औद्योगिक संस्थाएँ श्रमिक संघ इत्यादि। इन संगठनों का उद्देश्य मनोरंजनात्मक कार्यक्रमों द्वारा व्यक्तियों को अपनी रुचियों के अनुसार शिक्षा मनोवृत्ति तथा व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करना है। अत: इस प्रकार से समाज कार्य को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से देखा जा सकता है। अमेरिका में बनाए गए कुछ महत्वपूर्ण विधान एवं कार्य एकनज़र में सन 1911 ई. में नेशनल फेडरेशन ऑफ सेटलमेंट की स्थापना समरूपता बनाए रखने के लिए की गई। सन 1896 ई. में प्रथम बाल क्लब की स्थापना की गई।
सन 1906 ई. तक अनेक क्लबों का निर्माण हुआ और सलाह तथा सहयोग के लिए राष्ट्रीय संगठन बनाया गया।
सन 1910 में सर बेडेन पावेल द्वारा अमेरिकी बाल स्काउट संघ की स्थापना की गई। सन 1912 में लड़कियों के लिए समान संगठन जूलियट लॉ द्वारा बनाया गया जिसका नाम: बालिका गाइड रखा गया।
उद्देश्य पैदल सैर, खेल, गाना, मनोविनोद, प्रयोग शाला, विचार विमर्श, सांस्कृतिक तथा शैक्षिक क्रियाओं में भाग लेने के लिए अवसर प्रदान करना था।
प्रथम विश्व युद्ध के समय वाई एम. सी. ए. तथा साल्वेशन आर्मी को भी नियुक्त किया गया। सन 1923 में क्लीवलैंड में समाजकार्य के स्कूल में प्रथम प्रशिक्षण कोर्स समूह अनुभव कार्य के नाम से प्रारंभ हुआ।
सन 1926 में एक प्रयोगात्मक सेटलमेंट की नींव प्रशिक्षण के उद्देश्य से रखी गई।
सन 1930 तक सामूहिक कार्य विकास के लिए अनेक कदम उठाए गए तथा संबंधित संगठनों का विकास हुआ।
पिट्सबर्ग में 4 व 5 नवम्बर 1933 ई0 को विभिन्न संस्थाओं के समूह नेताओं की एक बैठक हुई। यह अपने प्रकार की प्रथम बैठक हुई जिसमें विभिन्न प्रकार की समितियों का निर्माण हुआ। जैसे अनुसंधान समिति प्रशिक्षण समिति, स्तर निर्धारण समिति इत्यादि।
सन 1935 राष्ट्रीय समाज कार्य कांफ्रेंस का आयोजन |
सन 1936 में अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द स्टडी आफ द ग्रुप वर्क का गठन जिसे आज अमेरिकन एसोसिएशन आफ ग्रुप वर्क्स के नाम से जाना जाता है।
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