समाज कार्य में दूरवर्ती शिक्षा पर शोध - Research on Distance Learning in Social Work
समाज कार्य में दूरवर्ती शिक्षा पर शोध - Research on Distance Learning in Social Work
समाज कार्य के दूरवती शिक्षा पर शोध कुछ दशकों में बढ़ा है। इन शोध अध्ययनों मेंआई. टी. बी. की प्रभाविकता का परीक्षण करने वाले अत्यधिक अध्ययन किए गए हैं जबकि कम्प्यूटर संबंधित संचालित पाठ्यक्रमों पर शोध मंद गति से बढ़ रहा है। स्नातक स्तर पर एक संपूर्ण ऑनलाइन समाजकार्य पाठ्यवस्तु का मूल्यांकन करने वाला अध्ययन एस विल्के तथा विंटन ने उपलब्धकराया है। इन विभिन्न मूल्या कनों के केन्द्र में यह निश्चित करने का प्रयास किया गया है कि छात्र एक दूरी से शिक्षा प्राप्ति के परिणाम विश्वद्यालय या कॉलेज परिसर में नियमित पढ़ने वाले से तुलना करने योग्य है। दूरवर्ती शिक्षा का मूल्यांकन आम तौर पर व्यक्तिनित पाठ्य वस्तु में पूर्व परीक्षण एवं उत्तर परीक्षण परिवर्तन की परीक्षा से सुसंगत होता है। आसानी से उनकी तुलना नहीं की जा सकती है क्योंकि वे विभिन्न पाठ्यवस्तुओं तथा प्रशिक्षकों पर ध्यान देते हैं। उदाहरणस्वरूप कुछ अध्ययनों में समान प्रशिक्षकों ने दूरवर्तथा नियमित दोनों कक्षाओं को पढ़ाया जबकि अन्यों में इनसे अलग प्रशिक्षक थे। समाज कार्य शिक्षण में दूरवर्ती शिक्षण के प्रारंभिक अध्ययनों में आईटी. वी. की प्रभावोत्पादकता पर ध्यान केन्द्रित किया। बी. डॉल्टन (2001) द्वारा एक एफ. एम. एस. डब्ल्यू की प्रणालियों की कक्षा का मूल्यांकन किया गया। इसमें उन्होंने चार समूह बना दो परम्परागत नियमित कक्षा एक दूरवर्ती किंतु परिसर स्थित कक्ष में तथा एक आई. टी. बी. द्वारा व्याख्यान को देखते हुए की तुलना की थी। पैट्राची तथा पेचनर (2001) द्वारा एक एम. एस. डब्ल्यू के शोध प्रणालियों के पाठ्यक्रमों के मूल्यांकन में दो वर्षों तक नियमित छात्रों तथा आई. टी. वी. छात्रों की तुलना की गई थी। जनांकिकीय विशेषताओं के लिए नियंत्रण के बाद पूर्व परीक्षण तक परिवर्तनों पाठ्यवस्तु श्रेणियों तथा पाठ्यवस्तु मूल्यांकनों पर इन समूहों के बीच कोई अंतर देखने को नहीं मिला।
होलिस्टर तथा मैकगी (2000) ने दूरवर्ती तथा नियमित छात्रों के बीच द्रव्य व्यसन तथा बाल कल्याण पाठ्यक्रमों में तुलनीय उपलब्धि प्राप्त की तथा उनके ज्ञानार्जन के स्वमूल्यांकन के संदर्भ में उन्हें समूहों के बीच कोई अंतर नहीं पाया नियमित छात्रों तथा आई. टी. वी. के छात्रों में सामाजिक नीति के स्नातक पाठ्यक्रम में दोनों में समान रूप से महत्वपूर्ण तरीके से समालोचनात्मक विचार कौशलों में सर्वजन ही हुआ। स्नातक स्तरीय समाजकार्य अभ्यास एवं कक्षा में श्रेणियों तथा प्रशिक्षकों के अवबोध के संदर्भ में भी परिसर स्थित नियमित छात्रों तथा दूरस्थ छात्रों के बीच कोई भी अंतर नहीं पाया गया। हागा तथा हीतकैम्प ने नियमित छात्रों तथा दूरस्थ छात्रों के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया तथा उन्होंने अपने प्रतिवेदन में बताया कि उनमें भिन्नता है उन्होंने स्नातक स्तरीय समाजकार्य उपाधि कार्यक्रम जो चार ग्रामीण स्थलों से संबंधित थे नियमित छात्रों तथा दूरस्थ आईटी. पी. छात्रों में अंतर पाया गया। उन्होंने बताया कि दूरस्थ छात्रों में असंतोष व्याप्त था और यह असंतोष बुनियादी तौर पर प्राविधिक कठिनाईयों से संबंधित था। एक सप्तवर्षीय अनुगमन अध्ययन किया गया जिसमें दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के छात्रों को मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में नियुक्त किया गया। फ्रडोलिनों तथा सदरलैण्ड ने अपने अध्ययन में आई. टी. बी. द्वारा पूर्णतः संचालित समाज कार्य पाठ्यक्रम एम एस. डब्ल्यू व अन्य मूल्यांकन में पाया कि ज्ञानार्जन समझ में परिसर स्थित या नियमित छात्रों तथा दूरस्थ छात्रों के बीच कुछ अंतर पाया गया। इसके अतिरिक्त समूहों में क्षेत्र एवं स्थानीयता के अवबोध तुलनीय थे।
समाज कार्य में ऑन लाइन शिक्षण की प्रभावोत्पादकता पर अध्ययन प्रकाशित होना शुरू हुआ है। जबकि अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में उस विषय का आधार विकसित हो गया है। ऑनलाइन कक्षाओं में छात्रों की संलिप्तता का स्तर उनके शिक्षण के समझ को दुष्प्रभावित करता हुआ दिखाई पड़ता है दो समाज कार्य प्राध्यापक प्रोफेसर स्टॉक तथा फ्रेडोलीनों ने वर्ष 2000 में एक अध्ययन में पाया कि एक ऑन लाइन समाज कार्य शोध प्रणाली कक्षा में परिचर्चा के दौरान अंतः क्रियाशीलता का स्तर बढ़ा तब छात्रों ने उस कक्षा परिचर्चा में अधिक सहभागिता की तथा पाठ्यक्रम को अधिक सकारात्मक रूप में देखा। स्टेट यूनिवर्सिटी फ्लोरिड़ा ने 2002 में एक सहकालिक पूर्णतः ऑनलाइन समाज कार्य में परास्नातक कार्यक्रम प्रारंभ किया। उस कार्यक्रम के मूल्यांकन पर एक लेख में बिल्के तथा विंटन 2006) में जनांकिकीय, शैक्षणिक विशेषताओं, ज्ञान, मूल्यों तथा कौशलों, क्षेत्र मूल्यांकनों पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षक मूल्यांकनोहेतु पहले तथा बाद के परीक्षण के दौरान प्राप्त अंकों के संदर्भ में नियमित तथालन लाइन अध्ययनरत छात्रों का तुलनात्मक अध्ययन किया तथा उन्होंने पहले परीक्षण परिणाम में देखा कि नियमित छात्रों की अपेक्षा अधिकतर ऑन लाइन अध्ययन करने वाले छात्रों ने अपनी स्तातक उपाधियां पहले अर्जित की। उनको काम का अधिक अनुभव था तथा उन्होंने प्रतिसप्ताह अधिक घंटे काम किया। बाद के परीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि ऑन लाइन तथा नियमित छात्रों को नैदानिक कौशल प्रदान किया गया तो दोनों छात्रों के अर्जितांक बह गए। लेकिन एक अपवाद यह भी दिखा कि नियमित छात्रों की अपेक्षा ऑनलाइन छात्रों ने अपने पठन पाठन शिक्षण की सुसाध्यता को निरंतर आंका जबकि उनकी श्रेणियों, संपूर्ण पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षक मूल्यांकनों में कोई अंतर नहीं दिखाई दिया। अपने क्षेत्र प्रशिक्षकों द्वारा नौ में से चार क्षेत्रों में ऑन लाइन छात्रों को नियमित छात्रों से कमतर आँका गया बांकी आंकलन यथावत उच्च थे।
अमेरिका में 56 समाजकार्य अध्यापकों, जिन्होंने वेष आधारित व्यक्तीय पाठ्यक्रम को प्राप्त किया था, एक के सर्वेक्षण में वेब आधारित शिक्षण को कम प्रभावकारी पाया गया था। सामाजिक वातावरण में मानव व्यवहार सामाजिक, नीति तथा शोध पर पाठ्यक्रम वेब आधारित ढांचे के लिए अधिक उपयुक्त तथा अधिमानित था जबकि समाज कार्य अभ्यास कक्षाएं उपयुक्त था अभिबोधित थी। समाजकार्य शिक्षण के वैश्वीकरण में समाजकार्य के ऑन लाइन अध्यापक ने सहायता प्रदान की है। फिर भी सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक विचारधाराओं को समझने के संदर्भ में चुनौतियां अभी भी उसी रूप में हैं। समाज कार्य के बहुत से विभाग तथा महाविद्यालय भौगोलिक क्षेत्रों से परे लोगों को शिक्षित कर रहे हैं। उदाहरण के रूप में हम देख सकते हैं कि यूनिवर्सिटी ऑफ हांग कांग तथा युनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास के शिक्षक, शंघाई में फ्यूडनू यूनिवर्सिटी के साथ छात्रों को मास्टर इन सोशल सर्विस मैनेजमेंट प्रदान करने में सहयोग कर रहे हैं।
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