प्रवासन के प्रकार - Types of Migration
प्रवासन के प्रकार - Types of Migration
एक ही देश की सीमाओं में रहकर प्रवासन मुख्य रूप से चार प्रवाहों को उत्पन्न करता है
1. ग्राम से ग्राम की ओर प्रवासन
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से कृषि व्यवसाय पर आधारित रहती है। लोग फसल कटाई, बुबाई अथवा दोनों के लिए एक गाँव से दूसरे गाँव को स्थानांतरित होते रहते हैं। जनन स्थान के लोग गंतव्य स्थान पर खेतों में काम करने के उद्देश्य से जाते हैं और ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जनन स्थान पर खेती के अवसर कम मात्रा में उपलब्ध हो पाते हैं। इसके अतिरिक्त यह भी हो सकता है कि जनन स्थान में जनसंख्या की अधिकता हो जिसके कारण पर्याप्त मात्रा में काम उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इस प्रवासन में अधिक संख्या पुरुषों की होती हैं।
2. ग्राम से शहर को ओर प्रवासन
ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर गमन एक सामान्य घटना है। यह प्रवासन मुख्य रूप से उद्योगीकरण विकास के कारण उत्पन्न रोजगार के अवसरों को प्राप्त करने के लिए होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती निर्धनता शिक्षा का अभाव, स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी, अपेक्षाकृत कम रोजगार के अवसर, कम व अनिश्चित वेतन आदि प्रमुख कारण जनसंख्या को शहर प्रवासन के लिए प्रेरित करते हैं।
3. शहर शहर की ओर प्रवासन
समान्यतः इस प्रकार का प्रवासन आर्थिक दशा को समृद्ध करने से संबंधित होता है। इसमें लोग छोटे शहरों से बड़े शहरों को उच्च आर्थिक रोजगार अवसरों की तलाश हेतु पलायन करते हैं। साथ ही बड़े शहरों में आर्थिक के अलावा सामाजिक सांस्कृतिक पक्षों से संबंधित सुविधाएं भी उपलब्ध रहती है जो प्रवासन हेतु लोगों को आकर्षित करती हैं।
4. शहर से ग्राम की ओर प्रवासन
शहर से ग्राम की ओर प्रवासन एक प्रकार का प्रति प्रवाह है। यह प्रवासन इसलिए होता है, क्योंकि शहरों के अतिसंकुल व पर्यावरणीय प्रदूषण से उत्पन्न समस्याओं व खराब स्वास्थ्य की समस्याओं आवास संबंधी समस्याओं के कारण लोगों का शहर में रहना दूभर हो जाता है। इनके अलावा कुछ प्राकृतिक दशाएँ भी हैं जिनके कारण लोग शहर से गाँव की ओर प्रवासन करते हैं।
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