शिक्षा - Education

शिक्षा - Education

अच्छे राष्ट्र राज्य के लिए नागरिकों का स्वास्थ्य जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है नागरिकों का शिक्षित होना। शिक्षा को लेकर कई विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त गए हैं, जिनमें से कुछ विद्वानों के विचार निम्नलिखित है फ्राबेल के अनुसार, “शिक्षा एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक बालक अपनी शक्तियों का विकास करता।

स्वामी विवेकानंद के अनुसार मनुष्य में अर्तनहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है।" महात्मा गांधी के अनुसार "शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक या मनुष्य के शरीर, मस्तिष्क या आत्मा के सर्वागीण एवं सर्वोत्तम विकास से है। अरस्तु के अनुसार, "स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करना ही शिक्षा है।"


पेस्टालोजी के अनुसार "मानव की आंतरिक शक्तियों का स्वाभाविक व सामंजस्यपूर्ण प्रगतिशील हरबर्ट स्पेन्सर के अनुसार शिक्षा से से तात्पर्य अंतर्निहित शक्तियों तथा बाह्य जगत के मध्य समन्वय विकास ही शिक्षा है।" स्थापित करना है।"


उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर हम यह कह सकते है कि शिक्षा से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है, जिससे वह अपने समाज का विकास करता है। एक अच्छे देश का विकास तभी संभव होगा जब उस देश के लोगों का शैक्षणिक विकास हो ।