नीति निदेशक तत्वों का महत्व - Importance of Directive Principles of Policy

नीति निदेशक तत्वों का महत्व - Importance of Directive Principles of Policy

• अनुच्छेद 37 घोषित करता है कि नीति निदेशक तत्व देश के शासनमें मूलभूत हैं।


• चूँकि सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी है नीति-निदेशक तत्व सभी आगामी सरकारों के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं।


• नीति निदेशक तत्व इन सरकारों की सफलता विफलता का आकलन करने के लिए मानदंड प्रस्तुत करते हैं। निदेशक तत्वों की उपलब्धियां 


• कर्मकारों के लिए कार्यस्थल पर मानवोचित दशाओं को बनाने के लिए कारखानों से संबंधित अनेक कानून हैं।

 

अनुच्छेद 421 • कुटीर उद्योगों का संवर्धन करना सरकार की आर्थिक नीतियों में प्रमुख रूप से रहा है और इस उद्देश्य के लिए खादी व ग्रामोद्योग आयोग भी है। इसके अतिरिक्त सिल्क बोर्ड हथकरपा बोर्ड और नाबाई आदि का भी सृजन किया गया है।


• शिक्षा प्रशासन तथा अर्थव्यवस्था में महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों व अन्य पिछड़े वर्गों सहित कमजोर वर्गों को प्राथमिकता प्रदान करना व्यवहार सरकार की कल्याणकारी नीति का एक भाग रहा है। इसमें नवीनतम है मंडल आयोग की रिपोर्ट का क्रियान्वयन जिसके लिए 1992 में सर्वोच्च यायालय ने न्यायिक अनापत्ति प्रदान की अनुच्छेद 46 मौलिक अधिकार व निदेशक तत्वों में अंतर आधार प्रदान करते हैं, 


● मौलिक अधिकार भारत के राजनीतिक प्रजातंत्र को आधार प्रदान करते हैं जबकि नीति-निदेशक तत्व भारत के सामाजिक व आर्थिक प्रजातंत्र को


● मौलिक अधिकार राज्य के निषेधात्मक कर्तव्य के रूप में है, अर्थात राज्य की निरंकुश कार्यवाहियों पर प्रतिबंध है। इसके विपरीत नीति-निदेशक सिद्धांत नागरिकों के प्रति राज्य के सकारात्मक कर्तव्य


● जहाँ मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं वही नीति-निदेशक सिद्धांत न्यायालय द्वारा