जनसंख्या और संसाधन - Population and Resources

जनसंख्या और संसाधन - Population and Resources

मनुष्य के अनेक उद्देश्यों आवश्यकताओं की पूर्ति व समस्याओं के समाचाअथवा उसमें योगदान करने वाले स्रोत को ही संसाधन कहा जाता है। हालांकि मनुष्य का ज्ञान ही सबसे उत्तम संसाधन है क्योंकि उसके ज्ञान, सामाजिक-सांस्कृतिक व राजनैतिक संगठन के कारण ही प्राकृतिक तत्व संसाधन के रूप में पर्णित होते हैं।


प्रो.कार्बर के अनुसार, "समृद्ध पर्यावरण के मध्य भी समुदाय और राष्ट्र निर्धन रहे हैं। पर्याप्त व उत्तम प्रकार के संसाधन होने के बावजूद मानवीय संसाधन की कमी के कारण ही राष्ट्र विनाश की ओर अग्रसर हो गए।

प्रो. ए. मुखर्जी का कथन है, "किसी भी राष्ट्र की उन्नति वहाँ के मानवीय संसाधन राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है किंतु उन संसाधनों के समुचित प्रयोग न होने नवीन रोजगार अवसरों की अनुपलब्धता आदि से राष्ट्र की जनसंख्या भार स्वरूप बन जाती है। राष्ट्र के लिए अपनाई गई नीति में मानव शक्ति का आयोजन एक मूल तत्व होता है।"


किसी राष्ट्र अथवा क्षेत्र की जनसंख्या और संसाधनों के मध्य घनिष्ठ संबंध पाया जाता है 20वीं शताब्दी के दौरान विश्व के विस्तृत क्षेत्र में खाद्यान आपूर्ति की समस्या उत्पन्न हो गई। विश्व के जनसंख्या वितरण व संसाधन की उपलब्धता में उत्पन्न असंतुलन के कारण आर्थिक विकास प्रभावित होता है। अतएव वर्तमान संदर्भ में जनसंख्या और संसाधनों के अंतसंबंध व उसके संतुलन को विश्लेषित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

जनसंख्या वृद्धि और समाज को उससे होने वाली समस्याओं पर वर्णन प्रस्तुत किया गया। जनसंख्या से संबंधित कुछ दृष्टिकोणों को भी प्रस्तुत किया गया जो जनसंख्या की वृद्धि और उसके नियंत्रण पर अपने मत को प्रस्तुत करते हैं। जनसंख्या का पर्यावरण और संसाधन के साथ अंतसंबंध को भी विश्लेषित करने का प्रयास इस इकाई के मध्य से किया गया है।