जनसंख्या वृद्धि और जनित समस्याएँ - Population growth and problems arising

जनसंख्या वृद्धि और जनित समस्याएँ - Population growth and problems arising

जनसंख्या वृद्धि और जनित समस्याएँ - Population growth and problems arising

जनसंख्या से आशय एक निश्चित क्षेत्र में निवासरत व्यक्तियों की संख्या से है और जब किसी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या में आवश्यकता से वृद्धि हो जाए तो उसे जनसंख्या वृद्धिकहा जाता है। इससे जनसंख्या का आकार ही नहीं वरन उसकी संरचना में भी परिवर्तन होता है। जनसंख्या वृद्धि से समाज में कई नवीन समस्याओं का जन्म होता है। जनसंख्या में जिस प्रकार से वृद्धि होती है उसी प्रकार संसाधनों में भी कमी आती जाती है। जनसंख्या वृद्धि का आकलन राजनेता व्यापारी, प्रशासक आदि भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से करते हैं। इंटेरनेशनल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ पापुलेशन में विश्व जनसंख्या में दर्ज की गई। वृद्धि निम्न तालिका के माध्यम से प्रस्तुत की जा रही है


19वीं शताब्दी में यूरोपीय औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप जनसंख्या में अधिक वृद्धि हुई है। विगत कुछ वर्षों में तेज हुई औद्योगीकरण, नगरीकरण के कारण यह वृद्धि तीव्रतर हो गई है। वैसे तो जनसंख्या वृद्धि संपूर्ण विश्व के लिए एक समस्या है परंतु भारत जैसे देश के लिए यह एक भीषण समस्या है। यहाँ जनसंख्या वृद्धि के कारण भूमि पर दबाव इतना बढ़ता चला जा रहा है कि निकट भविष्य में जनसंख्या संसाधन के संतुलन के बिगड़ जाने की संभावना है। जनगणना 2011 के आधार पर भारत में जनसंख्या की दशकवार वृद्धि इस प्रकार बताई गई है


एक कहावत है कि किसी भी चीज की अधिकता अच्छी नहीं है। फिर चाहे वह अधिकता किसी देश की जनसंख्या की ही क्यों न हो। भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर अवस्थित है। विश्व में जनसंख्या के मामले में चीन पहले स्थान पर है, परंतु वह दिन दूर नहीं जा भारत चीन से भी आगे निकल जाएगा, क्योंकि आँकड़ों की मानें तो चीन की एक वर्ष में 1% जनसंख्या वृद्धिदर है, जबकि भारत में जनसंख्या वृद्धि दर 20 है। भारत में जहाँ प्रतिदिन 60 शिशुओं का जन्म होता है वहीं पूरे विश्व में प्रीतिदिन 150 शिशु ही जन्म लेते हैं। बढ़ती जनसंख्या ने भारत में अनेक समस्याओं को जन्म दिया है 1. जनसंख्या के अति वृद्धि से आर्थिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जनाधिक्य के कारण जनसंख्या और संसाधनों के बीच असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। एशिया व अफ्रीका के विकासशील देश इसके उदाहरण हैं।


2. जनसंख्या वृद्धि के कारण देश में खाद्य आपूर्ति की समस्या उत्पन्न हो जाती है और संतुलित आहार न उपलब्ध हो पाने के कारण कुछ अन्य समस्याएं उभरने लगती हैं।


3. कृषि योग्य भूमि को निश्चित सीमा तक ही बढ़ाया जा सकता है। यद्यपि जनसंख्या जिस तीव्रता से बढ़ रही है उसकी तुलना में भूमि के उत्पादन को नहीं बढ़ाया जा सकता है। अर्थात जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि भूमि की समस्या उत्पन्न हो रही है।


4. जनसंख्या वृद्धि के कारण मनुष्य का जीवन स्तर निम्न होता चला जाता है।


5. जनसंख्या वृद्धि और अशिक्षा में अंतसंबंध साफ तौर पर पता चलता है। दोनों एक्टू सरे को पर्याप्त रूप से प्रभावित करते हैं।


6. अशिक्षा की तरह ही निर्धनता का संबंध भी जनसंख्या वृद्धि के साथ अंतसंबंधित है।


7. देश में रोजगार की समस्या भयावह रूप धारण कर लेती है। 8. यद्यपि यातायात और परिवहन के साधनों में का फी वृद्धि हुई तथापि दिनों-दिन बढ़ती भीड़ के कारण यह वृद्धि कम ही महसूस की जा रही है। 


9. जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप वायु प्रदूषणजल प्रदूषण आदि प्रकार की समस्याएँ पैदा हो रही हैं जो मनुष्य के लिए घातक हैं।


10. मनुष्य द्वारा अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वनों का विनाश किया जा रहा है जिसके कारण जलवायु और दशाएँ प्रभावित हो रही है। इसके कारण परिस्थितिकीय असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।


11. जनसंख्या वृद्धि के कारण मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँरोटी, कपड़ा और मकान) पूरी नहीं हो पा रही हैं, जिसके कारण समाज में विघटन की दशा उत्पन्न हो रही है।


12. खाद्य सामाग्री की कमी, निर्धनता, बेरोजगारी, जीवन स्तर की निम्नता के कारण जन जीवन के कलयम व सुरक्षा की भावना में निरंतर कमी आ रही है।