अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकार और संविधान - Rights and Constitution of Scheduled Castes and Scheduled Tribes
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकार और संविधान - Rights and Constitution of Scheduled Castes and Scheduled Tribes
भारतीय संविधान द्वारा जातिगत भेदभाव और छुआछूत को समाप्त कर दिया गया है तथा इसके निवारण के लिए विशेष प्रावधान भी दिए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 17, 23, 24 और 25 (2) (ख) में राज्य को अनुसूचित जातियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था करने का आदेश दिया गया है। अनुच्छेद ? का संबंध समाज में चल रही अस्पृश्यता की प्रथा के उन्मूलन से है। संसद ने अनुसूचित जातियों के साथ हो रही अस्पृश्या की समस्या के समाधान के लिए सिवित्त अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 अधिनियमित किए गए है। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को 30 जनवरी 1990 से लागू किया गया है। इन कानूनों में ऐसेदण्ड का प्रावधान है जो भारतीय पौनल कोड: और अन्य कानूनों के तहत संगत अपराधों से अधिक सख्त है। इसके अतिरिक्त संविधान के 65वें संशोधन कानून 1990 के अनुसार, 12 मार्च 1992 में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग प्रभाव में आया है, जिसमें दीवानी अदालत के कार्यों और अधिकार क्षेत्र में वो मसले भी आते हैं जो उनके सामाजिक आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
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