अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 - Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 - Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों पर अत्याचार याउत्पीड़न को रोकने के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक) अधिनियम (The Scheduled Castes and Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989) भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया। यह कानून एस.सी., एस. टी. वर्ग के सम्मान, स्वाभिमान, उत्थान एवं उनके हितों की रक्षा के लिए भारतीय संविधान में किए गए विभिन्न प्रावधानों के अलावा इन जाति के लोगों पर होने वाले अत्याचार को रोकने के लिए 16 अगस्त 1989 को उपर्युक्त अधिनियम लागू किया गया। वास्तव में अछूत के रूप में दलित वर्ग का अस्तित्व समाज रचना की चरम विकृति का द्योतक हैं।


भारत सरकार ने दलितों पर होने वाले विभिन्न प्रकार के अत्याचारों को रोकने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के आलोक में यह विधान पारित किया। इस अधिनियम में छुआछूत संबंधी अपराधों के विरूद्ध दंडमें वृद्धि की गई हैं तथा दलितों पर अत्याचार के विरूद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। इस अधिनिमय के अंतर्गत आने वाले अपराध संज्ञेय गैरजमानती और असुलहनीय होते हैं। यह अधिनियम 30 जनवरी 1990 से भारत में लागू हो गया। यह अधिनियम उस व्यक्ति पर लागू होता हैं जो अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है और इस वर्ग के सदस्यों पर अत्याचार का अपराध करता है। 


अधिनियम की धारा 3 (1) के अनुसार जो कोई भी यदि वह अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है और इस वर्ग के सदस्यों पर निम्नलिखित अत्याचार का अपराध करता है, तो कानून के अंतर्गत वह दंझीय अपराध माना जायेगा.


1. अनुसूचित जातिअनुसूचित जनजाति के सदस्यों को जबरन अखाद्य या घृणाजनक मल मूत्र इत्यादि) पदार्थ खिलाना या पिलाना।


2. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को शारीरिक चोट पहुंचाना या उनके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करने या क्षुब्ध करने के उद्देश्य से कूड़ा-करकट, मल या मृत पशु काय फक देना।


3. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को बलपूर्वक निर्वस्त्र करना या उसके चेहरे पर कालिख पोत कर सार्वजनिक रूप में घुमाना या इसी प्रकार का कोई ऐसा कार्य करना जो मानव के सम्मान के विरुद्ध हो 


4. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के आघटित भूमि पर से गैर-कानूनी ढंग से खेती काट लेना, खेती जोत लेना या उस भूमि पर कब्जा कर लेना 5. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को गैरकानूनी ढंग से उनके भूमि से बेदखल कर देना कर लेना) या उनके अधिकार क्षेत्र की संपत्ति के उपभोग में हस्तक्षेप


6. अनुसूचित जादि अनुसूचित जनजाति के सदस्य को भीख मांगने के लिए मजबूर करना या उन्हें बुंधुआ मजदूर के रूप में रहने को विवश करना या फुसलाना। 


7. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के सदस्य को वोट (मतदान) नहीं देने देना या किसी खास उम्मीदवार को मतदान के लिए मजबूर करना।


8. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरुद्ध झूदा परेशान करने के उद्देश्या से, पूर्ण अपराधिक या अन्य कानूनी आरोप लगा कर फंसाना या कारवाई करना।


9. किसी लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी अधिकारी) को कोई झूठी या तुच्छ सूचना अथवा जानकारी देना और उसके विरूद्ध अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को क्षति पहुंचाने या क्षुब्ध कसे के लिए ऐसे लोकसेवक उसकी विधि पूर्ण शक्ति का प्रयोग करना।


10. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को जानबूझकर जनता की नजर में जलील कर अपमानित करना, डराना।


11. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति किसी महिला सदस्य का अनादर करना या उन्हें अपमानित करने के उद्देश्य से शील भंग करने के लिए बल का प्रयोग करना।


12. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी महिला का उसकी इच्छा के विरुद्ध या बलपूर्वक यौन शोषण करना। 


13. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले जलाशय या जल स्रोतों को गंदा कर देना अथवा अनुपयोगी बना देना।


14. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को किसी सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोकना, कलिय अधिकारों से वंचित करना या ऐसे स्थान पर जाने से रोकना जहां वह जा सकता है।


15. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को अपना मकान अथवा निवास स्थान छोड़ने पर मजबूर करना या करवाना।


इस अपराध के लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। ऊपर वर्णित अत्याचार के अपराधों के लिए दोषी व्यक्ति को छह माह से पांच साल तक की सजा अर्थदंड (जुमांना) के साथ प्रावधान है। क्रूरतापूर्ण हत्या के अपराध के लिए मृत्युदण्ड की सजा है।