प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 - Prenatal Diagnostic Techniques Act 1994

प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 - Prenatal Diagnostic Techniques Act 1994

गर्भावस्था में ही मादा भ्रूण को नष्ट करने के उद्देश्य से लिंग परीक्षण को रोकने हेतु प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 निर्मित कर क्रियान्वित किया गया। इसका उल्लंघन करने वालों को 10-15 हजार रुपए का जुर्माना तथा 3-5 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यह लिंग चयन निषेध की ओर पहला कदम था किंतु इसका अनुपालन प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा था। इसके प्रभाविता को बढ़ाने के लिए 2001 में उच्चतम न्यायालय ने पर्यवेक्षी बोर्ड को अधिनियम की आवश्यकताओं का परिक्षण करने का दायित्व सौपते हुए 4 मई 2001 को एक आदेश पारित किया और अपने आदेश पर आधारित आवश्यक सिफारिशें केंद्रीय सरकार को की। इसके बाद संसद ने पूर्व निर्धारण लिंग चयन तकनीक और गर्भ चयन गर्भपातों के लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 2002 पारित किया।