निःशक्त व्यक्ति (अपंग) व्यक्ति समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995 - Persons with Disabilities (Disability) (Equal Opportunities, Protection of Rights and Full Participation Act, 1995)

निःशक्त व्यक्ति (अपंग) व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995 - Persons with Disabilities (Disability) (Equal Opportunities, Protection of Rights and Full Participation Act, 1995)

भारत सरकार द्वारा पारित अधिनियम में 74 धाराएं हैं जो 14 अध्यायों में बटी हुई है। निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995 की धारा 2(न), (जिसे पीडब्ल्यूडी अधिनियम, 1995 के रूप में भी जाना जाता है। विकलांग व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है, जो किसी चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा यथा प्रमाणित किसी विकलांगता से न्यूनतम 40 प्रतिशत पीड़ित है।

निःशक्तता की परिभाषा

लोकसभा द्वारा निःशक्तजन (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण सहभागिता अधिनियम 1995 पारित किए जाने के फलस्वरूप दिनांक जनवरी 1996 से लागू किया गया है। इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही भारत सरकार तथा राज्य सरकार को इसके प्रावधानों को लागू करने का दायित्व निर्धारित किया गया है।


धारा 2(टी) में निःशक्त व्यक्ति (समान, अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण सहभागिता) अधिनियम 1995 के प्रावधानों के तहत 40 प्रतिशत से अधिक निःशक्त व्यक्ति को मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया हो निःशक्त कहा गया है।

अधिनियम के द्वारा प्रत्येक वर्ग के निःशक्तजन की निःशक्तता निर्धारित करने हेतु परिभाषाएं दी हैं ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसमें 40 प्रतिशत से अधिक निःशक्तता होगी उसे ही केवल निःशक्त माना जाएगा। यह निःशक्तता चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रमाणित होना चाहिए। निःशक्तता से अभिप्रेत है


(i) अपना


(ii) कम दृष्टि


(iii) कुष्ठरोगमुक्त 


(iv) श्रवण शक्ति का हास


(v) चलन निःशक्तता


(vi) मानसिक मंदता


(vii) मानसिक रुग्णता


निःशक्त व्यक्ति (अपंग) व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995 के अनुसार निःशक्तता (अपंगता) 40 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।


निःशक्त व्यक्ति नियम 1996 के प्रावधानों के तहत मेडिकल बोर्ड के 3 सदस्यीय दल द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2010 में संशोधन किया जाकर मेडिकल बोर्ड में पदस्थ एक चिकित्सक द्वारा ही जिला स्तर पर आवेदक से आवेदन पत्र प्राप्त होने पर प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है। इस हेतु अधिकतम एक माह की समयावधि निर्धारित की है। 


उददेश्य


विकलांग व्यक्ति अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु विभिन्न कार्यकलापों हेतु विशेषकर विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक भवनों, राज्य सरकार सचिवालयों, राज्य विकलांगता आयुक्त के कार्यालय आदि में बाधामुक्त वातावरण सृजित किए जाने हेतु राज्य सरकारों और केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित संस्थानोंसंगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।