पंचायत राज विस्तार अधिनियम (पेसा), 1996 - Panchayat Raj Extension Act (PESA), 1996
पंचायत राज विस्तार अधिनियम (पेसा), 1996 - Panchayat Raj Extension Act (PESA), 1996
आदिवासी समुदायों में स्वालंबन पर आधारित स्थानीय स्वशासन और सार्वजनिक संसाधनों का समुदाय आधारित प्रबंधन एक स्वाभाविक एवं समृद्ध प्रक्रिया रही है। लेकिन आधुनिक प्रशासन की प्रणाली के साथ इसके विभिन्न अंतरविरोधों ने आदिवासी समुदाय के लिए गंभीर चुनौतिया पैदा की है। जटिलता यह है कि आधुनिक विकास संबंधी गतिविधियों को नकारा नहीं जा सकता और आदिवासी समुदाय को आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिलना भी आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से वर्ष 1993 में पारित 73 में संशोधन के अंतर्गत देश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की गई। लेकिन यह महसूस किया गया कि इसके कई प्रावधानों में अनुसूचित इलाकों को ध्यान नहीं रखा गया है। इस कमी को पूरा करने के लिए सांसद दिलीप सिंह भूरिया के नेतृत्व में एक कमेटी को अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था लागू करने संबंधी प्रावधान सुझाने का दायित्व सौंपा गया। भूरिया समिति की अनुशंसा के आलोक में संसद ने 1996 में ऐसा कानून बनाया। इसका पूरा नाम है पंचायत राज विस्तार अधिनियम 1996 पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) का अधिदेश संविधान के नौवें भाग, भाग IX के के अनुच्छेद 243 वप के अनुसार जिला योजना समिति के संबंध में प्रावधान और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पंचायत के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम, 1996 (पेसा) के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए है।
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