आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 - Criminal Law (Amendment) Act, 2013

आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 - Criminal Law (Amendment) Act, 2013

इस तरह के कानून की मांग दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में मेडिकल की एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के पश्चात् व्यापक तो पर की गई थी। सरकार द्वारा दिसंबर, 2012 में ही ऐसे कानून में किए जाने वाले प्रावधानों की संस्तुति के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अस वर्मा की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया, जिसकी संस्तुतियों के आधार पर राष्ट्रपति ने अनुच्छेदा 43 के तहत एक अध्यादेश जारी किया और उसी अध्यादेश को कुछ संशोधनों के साथ कानूनी स्वरूप प्रदान किया गया।

आलोच्य कानून के द्वारा लैंगिक अपराधों से जुड़े भारतीय दंडसंहिता भारत प्रमाण संहिता आपराधिक प्रक्रिया संहिता कानूनों में संशोधन किया गया। नए कानून में बलात्कार की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। बलात्कार के मामले में पीड़ित की मौत हो जाने या उसके स्थायी रूप से मृतप्राय हो जाने की स्थिति में मौत की सजा का प्रावधान भी इस कानून में किया गया है। सामूहिक बलात्कार के मामले में दोषियों के लिए धारा 376ए के तहत सजा की अवधि न्यूनतम 20 वर्ष रखी गई है, जो आजीवन कारावास तक हो सकती है। कानून में सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र18 साल तब की गई है। • महिलाओं का पीछा करने एवं तांकझांक पर कड़े दंडका प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में पहली बार में गलती हो सकती है, इसलिए इसे जमानती रखा गया है, लेकिन दूसरी बार ऐसा करने पर इसे गैर जमानती बनाया गया है। तेजाबी हमला करने वालों के लिए 10 वर्ष की सजा का भी कानून में प्रावधान किया गया है। इसमें पीड़ित को आत्मरक्षा का अधिकार प्रदान करते हुए तेजाब हमले की अपराध के रूप में व्याख्या की गई है। साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि सभी अस्पताल बलात्कार या तेजाब हमला पीड़ितों को तुरंत प्राथमिक सहायता या निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराएंगे और ऐसा करने में विफल रहने पर उन्हें सजा का सामना करना पड़ेगा।

कानून में कम-से-कम सात साल की सजा का प्रावधान किया गया है, जो प्राकृतिक जीवन काल तक के लिए बढ़ाई जा सकती है और यदि दोषी व्यक्ति पुलिस अधिकारी लोकसेवक, सशस्त्र बलों या प्रबंधनया अस्पताल का कर्मचारी है, तो उसे जुर्माने का भी सामना करना होगा। कानून में भारतीय साक्ष्य अधिनियम में संशोधन किया गया है जिसके तहत बलात्कार पीड़िता को, यदि वह अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हो जाती है, तो उसे अपना बयान दुभाषिये या विशेष एजुकेटर की मदद से न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराने की भी अनुमति दी गई है। इसमें महिला अपराध की सुनवाई बंद करने तथा कार्यवाही की विडियोग्राफी करने का भी प्रावधान किया गया है। इस कानून में महिलाओं के विरुद्ध अपराध की एफआईआर दर्ज नहीं कने वाले पुलिस कर्मियों को दंक्षि करने का भी प्रावधान है।