राष्ट्रीय बाल नीति (2013) - National Policy on Children (2013)

राष्ट्रीय बाल नीति (2013) - National Policy on Children (2013)

बाल विकास सरकार की जिम्मेदारी और आवश्यकता भी है। इन नन्हें नागरिकों के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। जैसा कि पिछली इकाई में यह जतमा गया कि पूरी जनसंख्या का एक चौथाई हिस्सा ये बालक ही है, अतः इनके संवर्धन के बिना विकास की कवायद करना निरर्थक प्रतीत होता है। इस क्षेत्र में सरकार द्वारा अनेक प्रयास किए गए हैं। इस इकाई में इन्हीं प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया आएगा और साथ ही कुछ अंतराष्ट्रीय प्रयासों की चर्चा भी की जाएगी।

26 अप्रैल 2013 को भारत सरकार द्वारा बालकों के लिए एक राष्ट्रीय नीति का नियोजन किया गया है। यह नीति 18 वर्ष की आयु से कम आयु से संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करती है। इस नीति में बचपन को जीवन का अटूट अंश माना गया है और यह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। किसी भी बालक के किशोर होने तक का पूरा कार्यकाल बचपनचात्वाकाल में ही संपन्न होता है और यही मनुष्य का नैतिकता व अन्य गुणों के बारे में संज्ञानात्मक व्यवहार की अभिव्यक्ति प्रदान करता है। इसलिए बालकों के विकास और उनकी सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक बहुआयामी व समावेशी परिप्रेक्ष्य रखना आवश्यक है। यहाँ इस नीति के प्रमुख निर्देशों का उल्लेख किया जा रहा है


1. प्रत्येक चालक को जीवन जीने का विकास सुरक्षा सहभागिता का अधिकार प्रदान किया जाना चाहिए।


2. बिना किसी भेदभाव के सभी बालकों को समान अधिकार दिया जाना चाहिए


3. बालकों से संबंधित सभी कार्यों व निर्णयों में बालकों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


4. बालकों के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से अनुकूल पारिवारिक वातावरण होना चाहिए। इस नीति को प्रभावी तरीके से कार्यान्वित किए जाने के प्रयोजन से एक राष्ट्रीय कार्ययोजना का निर्माण किया जाएगा और कार्यान्वयन की प्रगति का निरीक्षण करने के लिए एक राष्ट्रीय समन्वय और कार्यसमूह का गठन भी किया जाएगा।