खंड और गांव के स्तरों पर प्रशासनिक व्यवस्था - ग्राम विकास - Administrative Setup at Block and Village Levels - Rural Development

खंड और गांव के स्तरों पर प्रशासनिक व्यवस्था - ग्राम विकास - Administrative Setup at Block and Village Levels - Rural Development

समुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत खंडविकास का निर्माण योजना और एकीकृत ग्राम विकास की बुनियादी इकाई के रूप में किया गया था जिसमें कृषि और संबद्ध गतिविधियां जैसे शिक्षा स्वास्थ्य, समाज कल्याण आदि शामिल थे। इसमें स्व-सहायता और जनता की भागीदारी पर विशेष बल दिया गया था। खंड प्रशासन में खंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी (BDO) को रखा गया। उसकी सहायता के लिए कृषि, पशुपालन, सहकारिता, समाज कल्याण और सिंचाई आदि क्षेत्रों से लगभग आठ विस्तार कर्मी रखे गए।

इनके अतिरिक्त ग्राम स्तरीय कर्मचारी अथवा ग्राम सेवक सेविका और सहायक कर्मचारी भी खंड विकास अधिकारी की सहायता के लिए रखे गए। कार्यक्रम के लिए जनता का समर्थन जुटाने के उद्देश्य से खंड परामर्श समितियों का भी प्रावधान किया गया। किंतु कुछ समय बाद यह देखा गया कि खंड परामर्श समितियां ठीक से काम नहीं कर रही क्योंकि वे मात्र परामर्श देने वाली संस्थाए था जिनकी विकास कार्य में कोई सीधी जिम्मेदारी नहीं थी।


सामुदायिक विकास परियोजनाओ (1952) और राष्ट्रीय विस्तार सेवाओं (1953) की समीक्षा के लिए 1957 में बलवंतराय मेहता अध्ययन दल की नियुक्ति की। इस समिति ने यह सुझाव दिया कि उपर जिला स्तर और नीचे ग्राम स्तर को लेते हुए परस्पर संबद्ध त्रिस्तरीय ढांचे में खंड की बुनियादी इकाई तक सत्ता का विकेंद्रीकरण किया जाए।


खंड स्तर पर विकास कार्यक्रमों की समीक्षा बी डी. ओ. की अध्यक्षता में ग्राम स्तरीय कर्मचारियों और अन्य खंड कर्मचारियों की बैठक में पाक्षिक आधार पर की जाती है। खंड के सभी कार्यकलापों की समीक्षा भी उसके प्रधान की अध्यक्षता में पंचायत समिति की आम समिति की तिमाही बैठक में की जाती है। जहां बी. डी. ओ. सदस्य सचिव की हैसियत से उपस्थित रहता है। इस बैठक में पंचायत समिति के सदस्य, स्थानीय एस. डी. एम. संबंधित विकास विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी डी. आर. डी. ए. के प्रतिनिधि, उप प्रभागीय कृषि अधिकारी, स्थानीय तहसीलदार, अन्य विकास विभागों के खंड स्तर के अधिकारी और खंड स्तरीय समन्वय समिति होती है, जिसकी बैठक प्रत्येक महीने में एक निश्चित तारीख पर एक बार होती है। पंचायत समिति का प्रधान इसका अध्यक्ष होता है। खंड के बैंकों के सभी शाखा प्रबंधक और स्थानीय तहसीलदार भी इस समिति की बैठकों में भाग लेते है। सत्ता का विकेंद्रीकरण और प्रशासन सहित विकास संबंधी गतिविधियों पंचायतों के हाथ में आने से विकास प्रक्रिया में पंचायत समिति का महत्व काफी बढ़ गया है, लेकिन पंचायत समितिया दक्षतापूर्वक काम करे इसलिए प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में निर्वाचित सदस्यों की प्रबंध क्षमता में सुधार करना आवश्यक है।