राज्य स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था - ग्राम विकास - Administrative Setup at the State Level - Rural Development

राज्य स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था - ग्राम विकास - Administrative Setup at the State Level - Rural Development

ग्राम विकास कार्यक्रमों के प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की होती है। आजकल लगभग सभी राज्यों में एक अलग ग्राम विकास विभाग होता है और जिसका प्रमुख सचिव होता है। इसके उपर कृषि एवं ग्राम विकास हेतु विकास आयुक्त होता है। कुछ राज्यों में मुख्य सचिव स्वयं विकास आक्तु एवं सचिव होता है। 1960 के दशक के उत्तरार्द्ध में सभी राज्यों में राज्य स्तरीय समन्वय एवं समीक्षा समितियों का गठन किया गया था, जिनका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बैठाना था।

इन समितियों में सभी संबंधित विभागों आयोग के सचिव और केंद्र सरकार का एक एक प्रतिनिधि होता था। 1979. 1981 में योजना आयोग के कार्यक्रम मूल्यांकन संगठन ने छोटे किसानों सीमांत किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए लागू अत्योदय कार्यक्रम का अध्ययन करवाया था, जिसमें यह बात सामने आई कि राज्य स्तरीय समन्वय एवं समीक्षा समितियां आधिकांश रक्यों में सक्रिय नहीं थी और वे एजेंसियों को मार्गदर्शन अथवा सहयोग देने में भी विफल रही थी। राज्य स्तरीय प्रकोष्ठों से यह अपेक्षा की गई थी कि वे सामान्य पर्यवेक्षण करेंगे और विभिन्न विभागों की गतिविधियों में समन्वय सुनिश्चित करेंगे लेकिन वे भी अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाए।


ग्राम विकास के पूर्व केंद्रीय मंत्रालय ने यह निर्धारित किया था कि समेकित ग्राम विकास कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम और मरुस्थल विकास कार्यक्रम जैसे कार्यक्रमों की निगरानी एक अकेला विभाग करेगा जिसका नियंत्रण खंड और फील्ड स्तर के समूचे विकास प्रशासन पर होगा जिससे राज्य स्तर पर अन्य विभागों के साथ रके पर्याप्त क्षेत्र अंतर्गत समन्वय हो सकता है। इस मंत्रालय ने यह भी सिफारिश की थी कि आयुक्त स्तर पर एक अलग पद का निर्माण किया जाए तो सभी विशेष कार्यक्रमों को देखा जा सकता है। उसकी सहायता के लिए संयुक्त उपसचिव स्तर के मध्यम श्रेणी के अधिकारी हो जो जिला में इन कार्यक्रमों की निगरानी, निर्माण और क्रियान्वयन कर सके।