बाल विकास - Child Development
बाल विकास - Child Development
सामान्य तौर पर बच्चे के जन्म से लेकर किशोरावस्था के अंत तक होने वाले जैविक व मनोवैज्ञानिक विकास व परिवर्तन को बाल विकास कहा जाता है। इसमें बालक अधिक निर्भरता से अधिक स्वायत्तता की ओर अग्रसरित होते हैं। बाल विकास से संबंधित विद्वानों द्वारा अलगअलग सिद्धांत प्रस्तुत किए हैं और उससे संबंधित चरणों का उल्लेख भी किया गया है यथा पियाजे का नैतिक विकास सिद्धांत बाल्बी का लगाव का सिद्धांत एरिक्सन के मनोसामाजिक चरण, वाटसन का व्यवहार संबंधी सिद्धांत आदि। मूल रूप से आयु संबंधी विकास अवधियों और अंतरालों को निम्नप्रकार से प्रदर्शित किया जा सकता है
• नवजात (0 से माह)
• शिशु (1 माह से वर्ष) • नन्हा बच्चा (1 वर्ष से 3 वर्ष)
• प्रीस्कूली बच्चा (3 वर्ष से 6 वर्ष)
• स्कूली बच्चा (6 वर्ष से 13 वर्ष)
• किशोर किशोरी (13 वर्ष से 20 वर्ष)
बालक का विकास समाज के लिए आवश्यक होता है, क्योंकि यह वह शक्ति होती है, जो समाज को आगे की दिशा में बढ़ाने में सहायता करती है। विकास के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि बालक के सामाजिक, शैक्षणिक, भावात्मक व संज्ञानात्मक विकास को महत्व दिया जाए।
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