ग्रामीण विकास की संकल्पनाएं - Concepts of Rural Development

ग्रामीण विकास की संकल्पनाएं - Concepts of Rural Development

ग्राम विकास की अवधारणा की कल्पना शोधकर्ताओं द्वारा विभिन्न तरीकों से की गई जिसे विभिन्न उद्देश्यों और कार्यक्रम से लेकर अच्छी तरह निर्मित कार्यनीति दृष्टिकोण या केवल एक विचारधारा भी माना गया। अगर आप संबद्ध साहित्य का अच्छी तरह से अध्ययन करेंगे तो आपको यह आभास होगा कि इसका कार्य क्षेत्र और विषय सूची अस्पष्ट है और इसमें सर्वमान्य विश्लेषणात्मक सीमाओं का अभाव है। जैसा कि अक्सर देखा गया है कि हम इसे इसकी कमजोरी और साथ ही इसकी ताकत भी मान सकते हैं।

यह एक कमी अथवा कमजोरी है क्योंकि मुद्दे की अवधारणा की स्पष्टता के अलावा इसका यह भी तात्पर्य है कि इस विचार के कार्यान्वयन में अनिश्चिता है। यह एक शक्ति है क्योंकि ऐसी परिस्थिति नीति निर्माताओं को विभिन्न मूल वास्तविकताओं का आकलन करने में बहुत अधिक लचीलापन प्रदान करती है। ग्राम विकास की अवधारणा को साकार बनाना है तो एक व्यापक दृष्टिकोण होना चाहिए, जो इसका लाभ गरीबी उन्मूलन और वितरणात्मक न्याय के लिए होना चाहिए ताकि आर्थिक रुपांतरण हो सके। इस प्रकार के दृष्टिकोण पर आधारित ग्राम विकास के प्राथमिक उद्देश्य निम्नलिखित माने जा सकते हैं.


 जीवन स्तर में सुधार करना भोजन, कपड़ा, आवास, रोजगार और शिक्षा उपलब्ध कराना। 


ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता में वृद्धि और गरीबी में कमी करना।


निर्णय लेने में भागीदारी और प्रशासन के विकेंद्रीकरण के माध्यम से लोगों को नियोजन और विकास में सहभागी करना।


समाज में वितरणात्मक न्याय और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना। विकास का कोई भी सर्वमान्य उपागम नहीं है। हमने यह भी देखा कि विकास की प्रगति के लिए कार्यनीतियां आवश्यक है क्योंकि यह एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। इसी प्रकार ग्राम विकास की समस्या के लिए अनेक कार्यनीतियां हैं। विभिन्न विचार ग्राम विकास की समस्या को अलग ढंग से देखते हैं और अपने सिद्धांतों में विभिन्न प्रकार के कारकों पर बल देते हैं।