अनुसूचित जनजाति के निर्धारण संबंधी विधान - Determination of Scheduled Tribes Legislation
अनुसूचित जनजाति के निर्धारण संबंधी विधान - Determination of Scheduled Tribes Legislation
अनुच्छेद 366 (25) ने अनुसूचित जनजातियों को ऐसी आदिवासी जाति या आदिवासी समुदाय या इन आदिवासी जातियों और आदिवासी समुदायों के भाग या उनके समूह के रूप में जिन्हें इस संविधान के उद्देश्यों के लिए अनुच्छेद 342 में अनुसूचित जनजाति माना गया है परिभाषित किया है। अनुच्छेद 366 (25), जिसे नीचे उद्धृत किया गया है अनुसूचित जनजातियों के विशिष्टिकरण के मामले में पालन की जाने वाली प्रक्रिया को निर्दिष्ट करता है।
अनुच्छेद 342 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के विषय में और जहाँ वह राज्य है, राज्यपाल से सलाह के बाद सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा आदिवासी जाति या आदिवासी समुदायाँ या आदिवासी जातियों या आदिवासी समुदायों के भागों या समूहों को निर्दिष्ट कर सकते हैं जो इस संविधान के उद्देश्यों के लिए उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश जैसा भी मामला हो, के संबंध में अनुसूचित जनजातिमानी जाएगी।
संसद कानून के द्वारा धारा (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित जनजातियों की सूची में किसी भी आदिवसी जाति या आदिवासी समुदाय या किसी भी आदिवासी जाति या आदिवासी समुदाय के भाग या समूह को शामिल कर या उसमें से निकाल सकती है, लेकिन जैसा कि पहले कहा गया है, इन्हें छोड़कर, कवित धारा के अधीन जारी किसी भी सूचना को किसी भी बाद की सूचना द्वारा परिवर्तित नहीं किया जाएगा। इस प्रकार किसी विशेष राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में अनुसूचित जनजातियों का पहला विशिष्टिकरण संबंधित राज्य सरकारों की सलाह के बाद राष्ट्रपति के अधिसूचित आदेश द्वारा किया जाता है। ये आदेश तदनुपरांत केवल संसद की कार्रवाई द्वारा ही संशोधित किएना सकते हैं। उपरोक्त अनुच्छेद अनुसूचित जनजातियों का सूचीकरण अखिल भारतीय आधार पर न करके राज्योंकेंद्रशासित प्रदेशों के अनुसार करने का प्रावधान भी करता है।
अनुसूचित जनजातियों को विनिर्दिष्टत करने वाले संवैधानिक आदेशों में संशोधन राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 (1956 का अधिनियम 37) द्वारा 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के फलस्वरूप उपरोक्त 2 संवैधानिक आदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेशसंशोधन) अधिनियम, 1956 (1956 का अधिनियम (63) दिनांक 25 सितंबर, 1956 की धारा 4(1) और 4 (ii) के तहत संशोधित किए गए थे। राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 41 और बिहार एवं पश्चिम बंगाल (क्षेत्रों का हस्तांतरण) अधिनियम, 1956 (1956 का 40) का अनुसरण करते हुए राष्ट्रपति ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सूची (संशोधन) आदेश, 1956 जारी किया। संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 को सूची संशोधन आदेश 1956 की धारा 3(1) तहत संशोधित किया गया • जबकि संविधान अनुसूचित जनजाति (भाग ग राज्य) आदेश, 1951 को सूची संशोधन आदेश 1956 की धारा 3(2) के तहत संशोधित किया गया।
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