विकास - Development
विकास - Development
विकास की बहुआयामी अवधारणा को समझा, जो लोगों के जीवन के भौतिक गुणों में व्यवस्थित और सकारात्मक परिवर्तनों को सम्मिलित करता है। यह व्यक्तियों के भौतिक और सामाजिक कल्याण तथा आय और अवसरों का समान रूप से निष्पक्ष वितरण को भी संयुक्त करता है। 1960 और 1970 के दशकों के विकास के अनुभवों से पता लगा कि केवल आर्थिक विकास से विकासशील देशों में बेहतर जीवन स्तर प्राप्त नहीं होगा। ग्राम विकास आर्थिक संवृद्धि के अलावा अन्य कारकों पर भी ध्यान देता है। ये कारक हैं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर ढांचागत सुविधाएं रोजगार निर्माण और गरीबी उन्मूलना साथ ही कार्यनीतियां और नियोजन ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
योजना आयोग के प्रारंभ में अपनाए गए विकास संबंधी दृष्टिकोणों कानोकरशाही के व्यवस्था और ग्रामीण समाज में आर्थिक तथा सामाजिक बदलाव लाने की प्रक्रिया में इसकी भूमिका का विश्लेषण किया। साथ ही विभिन्न समितियों और आयोगों ने स्थानीय स्वायत्त शासन के हाथों में सत्ता सौंपने और विकास प्रक्रिया में जनता की भागीदारी होने पर बल दिया। पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देने वाला संविधान (73 वां संशोधन) अधिनियम 1992 को भी जाना।
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