जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (D.R.D.A.) का निर्माण - Creation of District Rural Development Agency (D.R.D.A.)

जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (D.R.D.A.) का निर्माण - Creation of District Rural Development Agency (D.R.D.A.)

पूर्ववर्ती ग्राम विकास मंत्रालय ने यह सिफ़ारिश की थी कि जिला स्तर पर नियोजन और क्रियान्वयन एजेंसी की भूमिका जिला ग्राम विकास एजेंसी को निभाना चाहिए। इस एजेंसी का अध्यक्ष कलेक्टर उपायुक्त अथवा जिला मजिस्ट्रेट हो सकता है। इसका सञ्चालन परियोजना निदेशक या परियोजना अधिकारी के रूप में कोई प्रयोजनमूलक अधिशासी कर सकता है। परियोजना अधिकारी की सहायता के लिए 2 से 3 सहायक परियोजना अधिकारी होते हैं। इसी के अनुसार जिला ग्राम विकास एजेंसियों का गठन स्वायत एजेंसियों के रूप में छठी योजना के प्रारंभ में हुआ जब देश के सभी खंडों में आई आर. डी. 1. एन. आर. ई. पी. की शुरूआत की गई।

मै पी. जिले में कार्यक्रमों के नियोजन, क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्याकन की प्रभार जिला ग्राम विकास एजेंसी पर होता है। उसके कार्य निम्नलिखित है -


कार्यक्रमों के उद्देश्य आयाम और आवश्यकताओं संबंधी जानकारी जिला और खंड स्तर की एजेंसियों को देना एवं उन्हें कार्य के संबंध में बताना।


खंड से संबंधित योजना और वार्षिक योजनाओं के सर्वेक्षण की तैयारी का समन्वयन तथा पर्यवेक्षण करना एवं अंत में एक जिला योजना तैयार करना।


नियमित मूल्यांकन करना और निगरानी के माध्यम से कार्यक्रमको प्रभावी बनाना।


स्थानीय और विभागीय समन्वय और सहयोग प्राप्त करना।


कार्यक्रमों के अंतर्गत अर्जित उपलब्धियों का प्रचार करना ज्ञान का प्रसारण करना और कार्यक्रमों के विषय में जागरुकता पैदा करना।


राज्य सरकारों का निर्धारित प्रपत्रों में नियमित अवधि में विवरण भेजना।