पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र - Fifth Schedule Areas

पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र - Fifth Schedule Areas

संविधान की पांचवीं अनुसूची किसी भी राज्य असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम विश्वविद्याल राज्य में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के रूप में भी शासन और अनुसूचित क्षेत्रों के नियंत्रण के साथ संबंधित है। संविधान की पांचवी अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुमोघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के अलावा अन्य किसी भी राज्य में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है। पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम, 1996" (पेसा), कुछ संशोधनों और अपवादों को छोड़कर संविधान के नौव भाग को संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत अधिसूचित पाचवीं अनुसूची क्षेत्रों के लिए विस्तारित करता है। वर्तमान में 10 राज्यों अर्थात् आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना में पांचवी अनुसूची क्षेत्र मौजूद है।


पेसा अधिनियम के अंतर्गत (अनुच्छेद 4 (ख)), आमतौर पर एक बस्ती या बस्तियों के समूह या एक पुरवा या पुरवों के समूह को मिलाकर एक गांव का गठन होता है जिसमें एक समुदाय के लोग रहते हैं। और अपनी परंपराओं और रीतिरिवाजों के अनुसार अपने मामलों के प्रबंधन करते हैं।


पेसा अधिनियम (अनुच्छेद 4 (ग)) के अंतर्गत उन सभी व्यक्तियों को लेकर हर गांव में एक ग्राम सभा


होगी, जिनके नाम ग्राम स्तर पर पंचायत के लिए मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं।


पेसा ग्राम सभा को निम्न के लिए विशेष रूप से शक्ति प्रदान करती है


i) (क) लोगों की परंपराओं और रिवाजों और उनकी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखना, 


(ख) समुदाय के संसाधन और 


(ग) विवाद समाधान के परंपरागत तरीके की रक्षा और संरक्षा निम्नलिखित कार्यकारी कार्यों को पूरा करना 


ii) सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं को मंजूरी देना गरीबी उन्मूलन और अन्य कार्यक्रमों के अंतर्गत लाभार्थियों के रूप में व्यक्तियों की पहचान करना तथा पंचायत द्वारा योजनाओं कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए धन के उपयोग का एक प्रमाण पत्र जारी करना।


ऐसा उपयुक्त स्तर पर ग्राम सभापंचायतों को निम्न लिखित की शक्ति प्रदान करता है


i) भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास में अनिवार्य परामर्श


ii) एक उचित स्तर पर पंचायत को लघु जल निकायों की योजना और प्रबंधन का कार्य सौंपा गया


iii) एक उचित स्तर की ग्राम सभा या पंचायत द्वारा खान और खनिजों के लिए संभावित पट्टा, रियायतें देने के लिए अनिवार्य सिफारिशें करने का अधिकार


iv) मादक द्रव्यों की बिक्री खपत को विनियमित करना।


(v) लघु वनोपजों का स्वामित्व


vi) भूमि हस्तांतृण को रोकना और हस्तांतरित भूमि की बहाली 


vii) गांव बाजारों का प्रबंधन


(viii) अनुसूचित जनजाति को दिए जाने वाले ऋण पर नियंत्रण तथा 


(ix) सामाजिक क्षेत्र में कार्यकर्ताओं और संस्थानों जनजातीय उप-योजना और संसाधनों सहित


स्थानीय योजनाओं पर नियंत्रण पेसा के कार्यान्वयन पर सबसे व्यापक दिशा-निर्देशों को 21 मई 2010 को जारी किए गए थे। दिशा निर्देशों में राज्यों को निम्न सलाह दी गई है


● आदर्श (मॉडल) पेसा नियमों को अपनाना।


● राज्य पंचायती राज अधिनियमों में ऐसा के प्रावधानों के अनुरूप संशोधन।


• खान एवं खनिज, लघु वनोपज आबकारी, पैसा उधार देने, आदि पर कानूनों, नियमों, कार्यकारी निर्देशों में संशोधन


• ग्राम सभा को सशक्त बनाना और ग्राम सभा द्वारा पालन करने के लिए 2 अक्टूबर, 2009 को जारी दिशा निर्देशों का अनुपालना


• मिशन मोड के रूप में ग्राम सभा को सक्रिय करना।


● पंचायत पदाधिकारियों (निर्वाचित प्रतिनिध एवं कर्मचारी के लिए ऐसा पर नियमित प्रशिक्षण का आयोजन


• पेसा के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक अंतरविभागीय समिति का गठन


• जनजाति सलाहकार परिषदों और जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सक्रिय करना।


• पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत बनाना।


● राज्य निर्वाचन आयोगों को गावों को परिसौमित करने के लिए अधिदेशा


• वन अधिकार अधिनियम, 2006 में दी गई लघु वनोपजों की परिभाषा को सभी कानूनों और नियमों में शामिल करना।