गोत्र: Gotra

 गोत्र: Gotra

गोत्र संगठन जनजातीय सामाजिक संगठन का एक विस्तृत रूप है। जनजातीय समाज का प्राथमिक सामाजिक संगठन परिवार होता है। परिवार से बड़ा सामाजिक संगठन अंश होता है तथा वंश से बढ़ा सामाजिक संगठन गोत्र होता है। इस प्रकार गोत्र कई वंशोएवं परिवारों का एक समूह होता है। यह एक बृहत रिश्तेदार समूह होता है। गोत्र के आधार पर ही वंशानुक्रम समूह का निर्माण होता है। वंशानुक्रम समूह पितृपक्षीय मातृपक्षीय या दिपक्षीय हो सकता है। वंशानुक्रम समूह अपने को प्राकृतिक या काल्पनिक वस्तुओं से संबंधि दशति हैं। ये लोग स्थानीय भी होते हैं या कई जगहों पर फैले होते हैं लेकिन एक ही पूर्व के मशन कहलाते हैं। ये लोग आपस में बहिर्विवाहानियम का पालन करते हैं। इस प्रकार गोत्र के माध्यम से इनके बीच मैवाहिक संबंध नियंत्रितहोते हैं। इस प्रकार गोत्र जनजाति का बहिर्विवाही विभाजन होता है, जिसके सदस्य एक दूसरे से आम संबंध द्वारा जुड़े रहते हैं। यह आम संबंध एक आम पूर्वज से वंशानुक्रम में विश्वास एक आम टोटम में उत्पत्ति या एक आम क्षेत्र में स्थित निवास स्थान के कारण विकसित होता है। गोत्र कई देशों के लोग से बना होता है। इसमें वंशानुक्रम का निर्धारण अंततोगत्वा एक काल्पनिक पूर्वज से किया जाता है। यह काल्पनिक पूर्वज एक मानव व्यक्तिमानव व्यक्ति समान, पशु-पक्षी, पेड-पौधा या निर्जीव हो सकता है