पिछड़े बालकों से संबंधित आवश्यक कल्याणकारी कार्य - Necessary welfare work related to backward children

पिछड़े बालकों से संबंधित आवश्यक कल्याणकारी कार्य - Necessary welfare work related to backward children

कुछ बालक ऐसे होते हैं, जिनका विकास सामान्य बालकों की अपेक्षा मंद होता है और वे सामान्य की अपेक्षा कम प्रगतिशील होते हैं। सिरिलवर्ट के अनुसार पिछड़ा बालक वह जो अपने विद्यालय जीवन के दौरान अपनी निचली कक्षा के उस कार्य को न कर सके जो उसकी आयु के बालकों के सामान्य कार्य हैं। सामान्य तौर पर जो बालक संपूर्ण कक्षा के औसत बालकों की अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ते हैं उन्हें पिछड़े बालकों की श्रेणी में रखा जा सकता है। इन बालकों की स्थिति व स्वरूप के आधार पर उन्हें निम्न वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है - 

1. मंद बुद्धि वाले पिछड़ेबालक

2. शारीरिक दोष वाले पिछड़े बालक 

3. ज्ञानेंद्रिय दोष वाले पिछड़े बालक

4. पर्यावरण के कारण पिछड़े बालक 

अनेक मनवैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मानसिक रूप से अस्वस्थ बालकों को समुचित शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराई जाए तो उनका भी विकास संभव है। इससे संबंधित अनेक अध्ययन भी हुए हैं, जो इस बात को पुष्ट करते हैं। पिछड़े बालकों के बारे में संज्ञान करने की प्रमुख विधियाँ निम्नवत है - 


बुद्धि परीक्षण के परिणाम

निष्पत्ति परीक्षण के परिणाम

पिछली कक्षाओं के परिणाम


शिक्षकों के मत

उक्त विधियों की सहायता से पिछड़े बालकों की पहचान की जा सकती है और उनके लिए विशिष्ट प्रावधान करने से उनके विकास को महत्व दिया जा सकता है।


विशिष्ट विद्यालय

इन चालकों के लिए विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए और इस और सरकार द्वारा भी उल्लेखनीय कदम उठाए जा रहे हैं। विशिष्ट विद्यालय विशिष्ट बालकों के विकास के लिए लाभप्रद सिद्ध होते हैं। इन विद्यालयों में यदि आवास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हो तो यह उन बालकों के लिए और भी उपयोगी होगा।


विशिष्ट कक्षाओं की व्यवस्था

सामान्य कक्षाओं से इन बालकों की समस्याओं को दूर नहीं किया जा सकता है इसलिए यह अति आवश्यक है कि पृथक और विशिष्ट प्रकार की कक्षाओं की व्यवस्था की जाए। इन कक्षाओं में सामान्य पाठ्यक्रम पढ़ने के साथ-साथ उनसे संबंधित कुछ शारीरिक क्रियात्मक कार्य भी कराएं जाए। साथ ही बालकों पर विशेष ध्यान दिए जाने के कारण वे स्वयं को सुरक्षित महसूस करेंगे और बेहतर निष्पादन करेंगे। इन कक्षाओं के संचालन में निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है - 


• कक्षा विशेष में एक ही प्रकार के बालक शामिल हो।

कक्षा में बालकों की संख्या कम हो।

अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग कक्षाओं की व्यवस्था की जाए। कालाशों की अवधि तुलनात्मक रूप से न्यून हो।

• अनुभवीच प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था की जाए और उनकी शिक्षण गति धीमी हो।


विशिष्ट पाठ्यक्रम

विशिष्ट विद्यालय और कक्षाओं की व्यवस्था के साथ यह भी आवश्यक है कि उनके लिए पाठ्यक्रम भी विशिष्ट प्रकार के हो। इस प्रकार के विशिष्ट पाठ्यक्रम व विधियों की व्यवस्था की जा रही है, जो नेत्रहीन मूक-बधिर व मंद बुद्धि बालकों के विकास में उपयोगी हो। मंदबुद्धि बालकों के लिए हस्तकला की शिक्षा पर जोर देना चाहिए यथा पेंटिंग कताई-बुनाई सिलाई-बुनाई आदि।

विशिष्ट शिक्षण विधियों का उपयोग

पिछड़े बालकों को सामान्य शिक्षण विधियों के माध्यम से पढ़ने पर ज्यादा लाभ नहीं प्राप्त होता। इसके स्वान पर उन्हें विशिष्ट शिक्षण विधियों के माध्यम से शिक्षा दिए जाने की आवश्यकता होती है। इसके लिए निम्न विधियों को उपयोग में लाया जा सकता है.


1. शिक्षण प्रक्रिया मंद गति से की जाए और इस प्रक्रिया में पुरावृत्ति के अवसर पर्याप्त मात्रा में के उपलब्ध हो।

2. सहायक सामग्री के उपयोग से शिक्षक को अध्यापन कार्य को सरल बनाना चाहिए।

3. यह ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है कि बालक तथ्यों को याद करके सीखें।

4. शिक्षक द्वारा व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराया जाए।

5. मूर्त-अमूर्त ज्ञान को सरल बनाकर चालकों को तथ्यों के बारे में अवगत कराएं।

6. कक्ष कार्य, गृह कार्य अभ्यास कार्य आदि पर और दें।


विशिष्ट अध्यापक

उक्त सभी तत्वों के सही ढंग से नियोजन के लिए आवश्यक है कि बालकों के लिए विशिष्ट प्रकार के शिक्षकों की व्यवस्था की जाए। इन अध्यापकों में निम्न विशेषताएं होनी चाहिए - 

1. इन अध्यापको को बाल मनोविज्ञान के बारे में व्यावहारिक ज्ञान होना आवश्यक है।

2. बालकों की शैक्षिक प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि शिक्षक प्रशिक्षित व पूर्ण रूप से योग्य हो। 

3. इन शिक्षकों का बालकों के प्रति व्यवहार भेदभाव रहित होना चाहिए। 

4. बालकों के प्रति वे स्नेही रवैया रखें।


बाल विकास और भारत में बालकों की समस्याओं के बारे में वर्णन प्रस्तुत किया गया है। बालकों का शोषण किया जा रहा है और उनसे बलात श्रम कराया जा रहा है और इस कारण से कई बालक आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं इन सभी समस्याओं के उन्मूलन हेतु अनेक बाल कल्याण कार्य किए जाते हैं। इस इकाई के अंत में पिछड़े बालकों के बारे में भी चर्चा की गई है और साथ ही उनकी शिक्षा के बारे में भी विचार प्रस्तुत किया गया है।