भारत में बालकों की समस्या - Problems of Children in India
भारत में बालकों की समस्या - Problems of Children in India
बालक एक ऐसा दुर्बल समूह होता है जो सामान्यतः दूसरों पर निर्भर रहता है। इस कारण से उन्हें अनेको छोटी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनमें से कुछ समस्याएँ तो सभी बालकों के लिए सामान्य होती हैं, परंतु कुछ समस्याएँ विशिष्ट होती हैं जो किसी विशेष बालक से संबंधित होती हैं। बालकों की समस्याओं को विद्वानों द्वारा कुछ श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जो इस प्रकार है -
1. सामान्य बालकों की समस्याएँ-
भारत में सामान्य तौर पर बालकों को निम्नप्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होती है.
● शिक्षा की समस्या
● स्वास्थ्य संबंधी समस्या
● पौष्टिक व समुचित आहार की समस्या
● उचित देखरेख न हो पाना
● मनोरंजन की समस्या
निर्धनता के कारण देश में अधिकांश बालकों को पर्याप्त मात्रा में आहार उपलब्ध नहीं हो पाता है. और यदि आहार उपलब्ध भी हो जाता है तो आसमें उचित मात्रा में पोषाहार की कमी होती है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सीय सुविधाओं की कमी के कारण पोषण की कमी को टीकाकरण से भी दूर कर पाना दुष्कर है। निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा होने के बावजूद भी लगभ 50 प्रतिशत बालक प्रारंभिक अवस्था में ही विद्यालय को त्याग देते हैं। साथ ही अभिभावक की अज्ञानता के कारण बालक की समुचित देखभाल नहीं हो पाती है।
2. अनाथ बालकों की समस्याएँ
प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, दुर्घटना सांप्रदायिक दंगों आदि के कारण बालक अनाथ हो जाते हैं और साथ ही कई बालक अपने माता-पिता व परिजनों से बिछड़ जाने के कारण भी इस श्रेणी में शामिल हो जाते हैं। सामान्य तौर पर समाज द्वारा इन बालकों को स्वीकार नहीं किया जाता है और उन बालकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रमुख निम्न -
संरक्षण की समस्या
पुनर्वास की समस्या
संस्थागत देखरेख से संबंधित समस्या
शिक्षा की समस्या
स्वास्थ्य व चिकित्सीय समस्या
3. विकलांग बालकों की समस्याएँ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में लगभग 9 करोड़ विकलांग है और इनकी संख्या में निरंतर 50 लाख प्रतिवर्ष की दर से बढ़ोतरी हो रही है। इन बालकों की समस्याएँ अत्यंत जटिल प्रकार की होती हैं प्रमुख निम्न हैं -
● स्वास्थ्य व उपचार की समस्या
● पुनर्वसन की समस्या
● संस्थागत देखरेख की समस्या
● विशिष्ट शिक्षा व प्रशिक्षण की समस्या
● मनोरंजन आर्थिक सुरक्षा की समस्या
4. बाल श्रमिकों की समस्याएँ-
14 वर्ष से कम उम्र के चालक इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है और इस धारणा को मान्यता देने के बावजूद भारत में विभिन्न उद्योगों में होटलों, दुकानों व्यवसाय, घरेलू कार्यों आदि में बालक काम करते हैं। इनसे संबंधित प्रमुख समस्याएँ निम्नवत है
● मजदूरी कम, कार्य अधिक
● निरंतर काम करने की मजबूरी
● अवकाश की कमी
● काम की कठिन दशाएँ
● शारीरिक प्रताड़ना
5. बाल अपराधियों की समस्याएँ-
पारिवारिक विघटन, अनाथ बालकों की संख्या में वृद्धि निर्धनता उन्मूलन के प्रभावों की विफलता अनैतिकता में वृद्धि आदि प्रकार के कारणों से बालकों के अपराध की ओर उन्मुख होने से बाल अपराध में वृद्धि हुईझे बाल अपराधियों की समस्याएँ निम्न होती हैं
● सुधार की समस्या
● पुनर्वास की समस्या देखभाल की समस्या
● शिक्षा व प्रशिक्षण संबंधी समस्या
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