बुजुर्गों एवं विशेष योग्यता वाले व्यक्तियों के लिए प्रावधान - Provision for the elderly and persons with special abilities

बुजुर्गों एवं विशेष योग्यता वाले व्यक्तियों के लिए प्रावधान - Provision for the elderly and persons with special abilities

चिकित्सा, न्यूट्रीशन तथा स्वच्छता सुविधाओं के बढ़ोतरीके कारण मानवीय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) में वृद्धि हुई है। भारत सरकार की वृद्ध स्थिति विश्लेषण रिपोर्ट (2011) में बताया गया है कि 65 प्रतिशत वृद्ध अपनी दैनंदिन सुविधाओं की प्राप्ति के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। 20 प्रतिशत वृद्ध महिला जिसमें प्रमुखता से पुरुष आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। 6-7 प्रतिशत ऐसे वृद्ध पुरुषहै जो अपनी पत्नी को आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। 85 प्रतिशत वृद्धअपने बच्चों पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं, 2 प्रतिशत अपने नाते-पोते पर आश्रित हैं तथा 6 प्रतिशत अन्य पर आश्रित है। वृद्ध महिलाओं में 20 प्रतिशत से कम अपने पति पर निर्भर हैं 70 प्रतिशत से अधिक अपने बच्चों पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं 3 प्रतिशत अपने बच्चों के बच्चों पर तथा 6 प्रतिशत वृद्ध महिलाएं उन लोगों पर निर्भर हैं जो इनके नाते संबंधी नहीं है।

2002 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाके के वृद्ध व्यक्तियों में से 50 प्रतिशत लोगों की मासिक प्रति व्यक्ति खर्च का स्तर 420 रुपये से 775 रुपये के बीच है और शहरी इलाके के वृद्ध व्यक्तियों का 665 रूपये से 1500 रुपये के बीच प्रति व्यक्ति खर्च का स्तर है। इतना ही नहीं 75 प्रतिशत से ज्यादा वृद्ध पुरुष और 40 प्रतिशत से कम वृद्ध महिलाएं अपने साथी के साथ जीवन यापन कर रही हैं। बाकी 20 प्रतिशत वृद्ध पुरुष और इसमें से आधी वृद्ध महिलाएं अपने बच्चों के साथ जीवन यापन कर रही हैं। इन आंकडें से पता चलता है कि भारत में वृद्धों की स्थिति कितनी भयावह है।


ऐसे में उनके अधिकारों की सुरक्षा तथा उचित देखभाल के लिए सामाजिक विधान की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य के साथ 15 जून को राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस तथा वर्ष 2000 को राष्ट्रीय वृद्धजन वर्ष घोषित किया गया तथा वृद्धों के लिए विभिन्न अधिनियमों को पारित किया गया। इस इकाई में हम इसी पर बात करेंगे। इसके पहले हम वृद्ध कौन हैं को संक्षेप में समझेंगे। 2.2 वृद्ध तथा बुजुर्ग आमतौर पर 60 साल की उम्र का अर्थ होता है वृद्धा 1999 के भारत सरकार के वृद्ध व्यक्तियों पर राष्ट्रीय नीति में 'वरिष्ठ नागरिक' या वृद्ध से तात्पर्य है ऐसा व्यक्ति जिसकी आयु 60 या उससे आगे है। इसी बात को 2007 में बने वृद्ध अधिनियम में दोहराया गया है। इस अधिनियम के अनुसार वरिष्ठ नागरिक से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो भारत का नागरिक है और जिसने साठ वर्ष या अधिक आयु प्राप्त कर ली है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर वृद्धावस्था का वर्गीकरणदो वर्गों में मिलता है..


• साल के आयु मर्यादा 74 साल से 60 दा के व्यक्ति को वृद्ध साल से आगे की आयु के व्यक्ति के लिए अतिवृद्ध  भाटिया (1983) ने वृद्धावस्था को तीन दृष्टिकोणों से परिभाषित किया है। इस कारण हम इस परिभाषा को छाता परिभाषा (Umbrela Defination) के रूप में देख सकते हैं। इसके अनुसार वृद्धावस्था को तीन आयामों से परिभाषित किया जा सकता है जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक-सांस्कृतिका


• जैविक वृद्धावस्था से तात्पर्य है बालों में सफेदी दातों की हानि और दृष्टी की स्पष्टता का हाम


 • मनोवैज्ञानिक रूप से वृद्धावस्था के संदर्भ में तंत्रिका तंत्र का अध्ययन किया जाता है। इसमें


मानसिक क्षमताओं में गिरावट उनके प्रति दूसरों के दृष्टिकोण और व्यवहारशामिल हैं। 


• सामाजिक सांस्कृतिक दृष्टिकोण परिवार समुदाय और समाज के सदस्य के रूप में व्यक्ति में परिवर्तन और बदलती परिस्थितियों को दर्शाता है। इन परिवर्तनों को माता-पिता की भूमिका, काम से सेवानिवृत्ति कम आय, रोग, विकलांगता और उनकी जरूरतें शामिल हैं। वृद्धावस्था स्वयं में एक समस्याग्रस्तता की अवस्था है इसे दूसरा बचपन भी कहा जाता है। ऐसे में इनके सामने विभिन्न तरह की समस्याएं आती है जिसका निवारण करने में वे अक्षम पाएं जाते हैं उन समयाओं के निवारण तथा उचित जीवन-यापन हेतु भारतीय संविधान उनके लिए विभिन्न प्रावधान के अंतर्गत सुरक्षा मुहैया कराता है।