ग्राम विकास नियोजन - Rural Development Planning
ग्राम विकास नियोजन - Rural Development Planning
हमारे देश की सामाजिक आर्थिक विशेषताओं में बहुत अधिक विविधता है। ग्राम विकास नीति निर्माताओं के सम्मुख एक प्रमुख समस्या है कि कैसे सूक्ष्म स्तर की आवश्यकताओं को अर्थव्यस्था की सकल नियोजन प्रक्रिया से जोड़ा जाए। ग्राम विकास की योजना बनाते समय विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं और समस्याओं को ध्यान में रखना पड़ता हैचूंकि कार्य क्षेत्र व्यापक है, साधारणतः ग्राम विकास की योजना बनाना और उस पर निगरानी करने में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। परिणामस्वरूप बहुस्तरीय नियोजन तंत्र को विकसित करने की आवश्यकता पड़ी।
ग्रामीण विकास के नियोजन को और अधिक महत्व तब मिला जब यह अनुभव किया गया कि गरीबी उन्मूलन के सीधे उपायों से सीमित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। गरीबों और शेषितों के उत्थान के लिए आर्थिक सहायता और विशेष प्रयास स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण है। अर्थव्यवस्था में लंबे समय के लिए उत्पादक आधार जोड़ने के लिए नियोजन अत्यंत आवश्यक है। स्थानीय क्षेत्र का नियोजन पंचायतों के माध्यम से ग्राम विकास लाने का महत्वपूर्ण साधन हो सकता है।
अखंडित नियोजन संरचना में उपर के लोग, स्थानीय स्तर पर विशिष्ट आवश्यकताओं को समझने में असफल रहते हैं तब स्थानीय नियोजन से उत्तरदायित्व अधिक जरूरी हो जाता है दुर्भाविवश 1990 के दशक के पहले से नीति निर्माण में नक उदारवादी विचारों की ओर तीव्र झुकाव होने से नियोजन के विचार को गहरा आघात लगा है। इस परिवर्तन से पहले की नीतियों में बहुत सी समस्याएं थीं लेकिन नियोजन की कमी और समस्याओं वस्तुओं की बाजार के हवाले छोड़ना भी हलमही है।
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