ग्रामीण विकास की नीतियां - Rural Development Policies

ग्रामीण विकास की नीतियां - Rural Development Policies

ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए विचारकों ने विभिन्न रास्ते सुझाए हैं। यह ध्यान में अवश्य रहना चाहिए कि ऐसा कोई भी एक सार्वभौमिक साधन नहीं है, जिससे सतत् विकास को सार्वभौमिक रूप से प्राप्त किया जा सके। विभिन्न आर्थिक और सामजिक तंत्रों को अपनी विशिष्टताएं ध्यान में रखकर ही ग्राम विकास को आगे बढ़ाना चाहिए।


1) ग्रामीण विकास की नीतियां


किसी भी ग्रामीण विकास योजना की अपनी विचारधारात्मक जड़े होती हैं, जिन पर इस कार्यनीति के तत्व आधारित होते हैं। एक कार्यनीति में इच्छित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न नीतिगत मानकों को व्यवस्थित करना होता है। विभिन्न कार्यनीतियां विभिन्न नीतियों पर बल देती है ताकि लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। फिर भी कुछ महत्वपूर्ण नीतियां है जो सभी प्रमुख ग्राम विकास कार्यनीतियों के लिए समान होती हैं, ये नीतियां भूमि प्रौद्योगिकी, कृषि रोजगार, शिक्षा, शोध, विस्तार, ग्रामीण संस्थाओं और कृषि उत्पादों के मूल्य आदि से संबंधित होती है।


ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार का मुख्य साधन कृषि ही है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि कृषि का नियोजन ग्राम विकास योजनाओं के लिए महत्त्वपूर्ण है। कृषि क्षेत्र कीसंतुलित वृद्धिउन्नति से इस क्षेत्र पर आश्रित लोगों के लिए बेहतर स्थिति उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है। ग्रामीण समाजों की गतिविधिया जैसा की हम जानते है अधिकतर कृषि और उससे संबद्ध अन्य गतिविधियों से संबंधित होती है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि इस संबंध में भूमि एक महत्वपूर्ण विषय है। जैसा कि सर्वज्ञात है कि भारत में भूमि और अन्य संपदा का वितरण बहुत पेचीदा हेफलस्वरूप बहुत बड़ी जनसंख्या के पास बहुत कम जमीन है। इसका ग्रामीण क्षेत्रों में आय अर्जित करने की क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। भूमि सुधार जिसमें काश्तकारों के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है ग्रामीण समाजों को रूपांतरित करने में एक प्राथमिक साधन है। साथ ही ग्रामीण समाजों में उपलब्ध तकनीकों में सुधार उन पर बहुत प्रभाव डाल सकता है। एक तरफ तो ग्रामीण क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल महत्त्वपूर्ण है, दूसरी तरफ उपलब्ध प्रौद्योगिकी को गांवों तक भी पहुंचना चाहिए। प्रौद्योगिकीय नियोजन शोध और विकास ग्राम विकास के लिए बहुत ही आवश्यक तत्व हैं। भारत में कृषि क्षेत्र मौसम के अनिश्चितता के चलते असुरक्षित है।

प्रौद्योगिकी उन्नति कृषि को मौसम के प्रभाव से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ग्रामीण समाज ग्रामीण क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकियों का चयन किया जाना चाहिए, जिससे बड़े स्तर पर श्रमिकों का पलायन न हो। ग्रामीण समुदायों के लिए उच्चतर उत्पादकता और रोजगार के बढ़ते अवसरों के बीच न्यायपूर्ण संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है। ग्राम विकास की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को बनया जाना चाहिए। अतः भूमि सुधार और भूमि नीति, जिससे वितरित न्याय प्रदान करने की आशा की जाती है उसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि हो सकती है। अतः ग्राम विकास कार्यनीति में भूमि नीति एक महत्वपूर्ण तत्व है।


भारत में, ग्रामीण क्षेत्रों में निरक्षरता की समस्या बहुत विकट है। शिक्षा का अभाव ग्राम विकास को आगे बढ़ाने में बाधक हो सकता है। ग्रामीण समाजों को जैसा कि आप जानते हैं आय और संपदा के वितरण में व्यापक विषमताओं से भी पहचाना जाता है। शिक्षा का अभाव ऐसी परिस्थिति उत्पन्न करता है जिससे यह समस्या और बढ़ जाती है। शिक्षा के प्रसार से एक तरफ तो गांव के गरीबों के लिए न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित होगा और दूसरी तरफ ग्राम विकास कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी में सहायता मिलेगी। मूल्य नीति का उपयोग भी ग्राम विकास नीति का एक महत्वपूर्ण तत्व है। प्रथम कृषि उत्पादों का मूल्य निर्धारण इस तरह से किया जाए, जिससे किसानों को उचित लाभ हो। दूसरा आर्थिक सहायता के उपयोग के माध्यम से मूल्य नीति एक ऐसे साधन के रूप में कार्य कर सकती है, जो ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को व्यापक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएं उपलब्ध करा सकती है। यह विशेषत गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।

राशन की दुकानों के नेटवर्क के माध्यम से वितरण व्यवस्थाके विस्तार द्वारा यह समस्या हल की जा सकती है। यह वर्षों की कमी के समय विशेषरूप से बहुत जरूरी है। जब ग्रामीण आय बुरी तरह से प्रभावित होती है जिसका उपभोग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आर्थिक सहायता के अन्य प्रकार भी हो सकते है। उदाहरण के लिए कृषि क्षेत्र में लागत अनुदान के रूप में उपलब्ध कराकर यह विशेषतः उर्वरकों कीटनाशकों और बीजों के मामले में महत्वपूर्ण है। अतः मूल्य नीति ग्राम विकास के उद्देश्यों को हासिल करने का एक उपयोगी साधन के रूप में कार्य करती है। नक उदारवादी दिशा में तात्कालिक चिंतन ने मूल्य नीतिक बहुत से पहलुओं में स्पष्ट परिवर्तन किए हैं और यह स्पष्ट है कि उदारीकरण के फलस्वरूप ग्रामीण भारत पर बहुत ज्यादा तनाव थोपा गया है जिसका कुछ भाग मूल्य नीति के कुछ पहलुओं में परिवर्तन के कारण है।