ग्रामीण विकास की परियोजनाएं और कार्यक्रम - Rural Development Schemes and Programs
ग्रामीण विकास की परियोजनाएं और कार्यक्रम - Rural Development Schemes and Programs
ग्राम विकास की परियोजनाओं और कार्यक्रमों के मध्य अंतर करना महत्वपूर्ण है। ग्राम विकास परियोजनाएं सूक्ष्म स्तर के प्रयास है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन लाते हैं। ये परिवर्तन कई आकार ले सकते हैं, जो साक्षरता के विकास में वृद्धि से लेकर कृषि उत्पादकता में वृद्धि के प्रयास तक हो सकते हैं। इन परियोजनाओं का प्रभाव सामान्यत: बहुत व्यापक नहीं होता क्योंकि यह कम लोगों तक सीमित होती हैं।
ग्राम विकास कार्यक्रम में कई परियोजनाएं सम्मिलित होती हैं जो एक दूसरे से जुड़ी होती हैं जिससे वे ग्रामीण आर्थिक और सामाजिक जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करती हैं। अतः ग्राम विकास एक दूसरे से जुड़ी कार्यक्रम, जो परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। एक व्यापक क्षेत्र के अधिकाधिक लोगों को प्रभावित करता है। पैमाने की समस्या की वजह से ग्राम विकास कार्यक्रमों का कार्यान्वयन बहुत कठिन हो जाता है। यह विशेषतः भारत जैसे देश में और अधिक है जहां ग्रामीण जनसंख्या बहुत अधिक बहुत विस्तारित और जिसकी सामाजिक, आर्थिक और संपादाओं में काफ़ी विभिन्नताएं हैं।
इन समस्याओं की वजह से ग्राम विकास कार्यक्रमों में प्रारंभ में उपयुक्त नियाजन और उन्हें पूरा करना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। साथ में कार्यक्रम का उपयुक्त निरीक्षण और मूल्यांकन एजेंसी की क्रियाविधि यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि कार्यक्रम अपने उद्देश्यों की पूर्ति लाभदायक तरीकों से कर रहे हैं। भारत का इस संदर्भ में अनुभव काफ़ी निर्देशात्मक है।
1. सामुदायिक विकास
1950 में प्रारंभ किए गए सामुदयिक विकास कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम विकास कार्यक्रम में लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करना था। इसने ग्रामीण समुदायों की सहभागिता से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया। सामुदायिक विकास कार्यक्रम ने देश के विभिन्न हिस्सों में चरणबद्ध तरीकों से ग्राम विकास को उन्नत करने का प्रयास किया। विकास की इकाई के रूप में गावों के एक समूह की पहचान की गई और प्रौद्योगिकी तथा प्रशासनिक कर्मचारियों का एक डांचा विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यक्रम लागू करने के लिए उपलब्ध कराया गया।
सामुदायिक विकास कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य निम्नवत हैं
• ग्रामीण क्षेत्रों में भौतिक और मानवीय संसाधनों को संपूर्ण विकास के लिए सुनिश्चित करना
● स्थानीय नेतृत्व और स्वशासी संस्थानों का विकास करना
• खाद्य और कृषि उत्पादों में तीव्र वृद्धि के माध्यम से ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना
लोगों कि मानसिक सोच को परिवर्तित करना और उनमें उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना
सामुदायिक विकास कार्यक्रम से ग्रामीण गरीबी पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि ग्रामीण समुदाय में जो लोग शक्तिशाली थे, उन्होंने ही इस कार्यक्रम से होने वाले लाभों को प्राप्त किया।
2. एकीकृत ग्राम विकास
एक संकल्पना के रूप में एकीकृत ग्राम विकास शब्द को व्यापक स्वीकृति प्राप्त हुई है, भले ही इस संकलाना को परिभाषित करने में ग्राम विकास के कुछ मूलभूत तत्वों को महत्व देते हैं। अधिकतर विकासशील देशों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना में व्यापक गरीबी खराब स्वास्थ्य स्थिति, निरक्षरता, शोषण, भूमि और अन्य संपदाओं का असामान्य वितरण ग्रामीण आधारभूत बाचे और जन सुविधाओं का अभाव जैसे लक्षण मौजुद हैं। स्पष्ट रूप से ग्राम विकास को आगे बढ़ाने के लिए इन सभी कारकों का ध्यान में रखते हुए समस्या को हल करने के लिए व्यापक कार्यनीति के उपागम की आवश्यकता होती है।
एकीकृत ग्राम विकास की संकल्पना का प्रचलन ग्राम नियोजन को बहुउदेश्यीय दबाव की जरूरत की वजह से हुआ। यह इस बात पर चल देता है कि ग्राम विकास के बहुत से पहलु, जिनका ग्रामीण जीवन पर प्रभाव है, परस्पर संबंधित हैं और उन्हें असग करके नहीं देखा जा सकता। अतः ग्राम विकास के लिए एकीकृत उपागम अति आवश्यक है। ग्रामीण जीवन के विभिन्न आयाम कृषि और संबद्ध गतिविधियों में वृद्धि ग्रामीण औद्योगिकरण शिक्षा, स्वास्थ्य 73/26 उन्मूलन और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम सभी मिलकर ग्राम विकास की समस्या के लिए एकीकृत उपागम का एक घटक है।
3. ग्राम विकास में स्थानीय स्तर की सहभागिता
1980 के दशक के अंत में स्थानीय स्तर की सहभागिता को भारत में अधिक बल दिया गया है। 1990 के दशक के प्रारंभ में संविधान का 73वां और 74वां संशोधन इस संबंध में विशेष महत्व रखते हैं। साथ ही विकासशील देशों के कई हिस्सों में, जिसमें भारत भी हैं, गैर सरकारी संगठन अब सहभागी विकास को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रहे हैं।
इन प्रयासों के मुख्य उद्देश्य निम्नवत हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशिष्ट लोगों को दबाना, जिससे कि ग्राम विकास की प्रक्रिया को गरीब लोग सक्रिय होकर साकार करें।
स्थानीय स्तर पर लोगों द्वारा महसूस की जा रही आवश्यकता को महत्व देना और उनकी उर्जा और दृष्टिकोण का उपयुक्त कार्यक्रमों के निर्माण में शामिल करना।
ग्रामीण समाज में परिवर्तन के लिए लोगों की दृष्टिकोण में शिक्षा का एक उपकरण की तरह उपयोग करना। शिक्षा का इस्तेमाल इस तरह से किया जाए कि यह लोगों को समाज में परिवर्तन लाने के लिए संगठित करने में सफल हो सका
4. ग्रामीण विकास की प्रमुख योजनाएं
ग्रामीण लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वर्तमान समय में कुछ योजनाएँ चलाई जा रही हैं जो निम्नलिखित
समन्वित ग्राम विकास कार्यक्रम 1976-77
ग्रामीण युवक स्वरोजगार प्रशिक्षण योजना (TRYSEM)- 1979
ग्रामीण क्षेत्रीय महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम (DWACRA)- 1982-83
ग्रामीण कारीगर योजना (SITRA)-1982 दस लाख कूप योजना (MWS)- 1988-89
अंत्योदय कार्यक्रम 1977
स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY)- 1999
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY)- 2001
ग्रामीण आवास योजनाएँ (RHS) में तीन योजनाएँ
1) इंदिरा आवास योजना 1985
2) वाल्मिकी अंबेडकर आवास योजना 2001
3) सूखा- संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)- 1973 5)
4) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)- 2000)
वार्तालाप में शामिल हों