ग्रामीण विकास - Rural development

ग्रामीण विकास - Rural development

ग्राम विकास, नियोजन की चिंता बन गया क्योंकि यह स्पष्ट हो गया था कि विकासशील देशों द्वारा अपनाई गई योजनाएं मुख्यतः गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण क्षेत्रों की विषमताओं को समाप्त करने में पूरी तरह से विफल रही है। यह स्पष्ट हो गया कि कृषि और औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के प्रयासों के अलावा शिक्षा की समस्या, स्वास्थ सेवाओं, रोजगार और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी की समस्या को दूर करने पर ध्यान देना होगा। ग्रामविकास में बढ़ती हुई रुचि इस बांध का परिणाम है कि ग्रामीण क्षेत्रों से विकासशील देशों की जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा रहता है। उसके लिए बेहतर जीवन स्थिति उत्पन्न करने के लिए क्रमबद्ध प्रयास की आवश्यकता है।


विनिर्माण क्षेत्र में प्रगति के द्वारा 1950 और 1960 दशकों के दौरान विकास के नीति निर्माताओं ने उत्पादन और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करनी चाही। कृषि उत्पादन के क्षेत्र में स्वतंत्रता के बाद के दो दशकों में कृषि उत्पादन में वृद्धि मुख्यतः कृषि के क्षेत्रफल में विस्तार और सहयोगी आधारभूत ढांचे को तैयार करने में जन निवेश की वजह से लाभ प्राप्त किया जा सका। शीघ्र ही यह अनुभव किया गया कि इन तरीकों के लाभ अपेक्षाकृत अधिक उपयोगी है।


एक छोटे समूह के लिए मुख्यतः उन लोगों को जो पहले ही बेहतर स्थिति में और सुविधा संपन्न थे एक छोटे समूह के लिए ऐसा माना जाता है कि इन प्रयासों से वास्तव में, जो लाभ हुए थे, उनसे ग्रामीण क्षेत्रों में आय से संबंधित और अधिक विषमताएं उत्पन्न हुई। 1970 तक यह स्पष्ट हो गया कि विकास के मुद्दों और समस्याओं को जिस प्रकार सुलझाया जा रहा था उसमें कहीं न कहीं गंभीर समस्याएं जरूर थी। विशेषत यह आशा की जा रही थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और गरीबी की समस्याओं का उचित हल होगा यह निश्चित रूप से पूरा नहीं हो पाया।


ऐतिहासिक रूप में यह देखा गया कि पश्चिमी समाजों में औद्योगिकरण और अर्थव्यवस्था की तरक्की को ग्रामीण समाज के प्रमुख आर्थिक परिवर्तनों से जोड़ा गया। हम इंग्लैंड की औद्योगिक क्रांति और यूरोप में अनेक देशों की क्रांतियों से परिचित है और अन्य देशों सहित जापानी उद्योग का परिपक्व होना ये सभी कृषि समाज में दूरगामी परिवर्तनों से शुरु हुआ। भूमि सुधार या अन्य वैधानिक सुधार कुछ देशों के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परिवर्तन लाने के साधन बने औद्योगिक विकास और आधुनिकरण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में वृद्धि और शहरीकरण हुआ। कई मामलों में उपनिवेशों तक पहुँच उनके आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण योगदान बना। साथ ही यूरोप से अधिक संख्या में लोगों का प्रश्नजन अतिरिक्त श्रमिकों को पुनर्स्थापित करने में मददगार हुआ।

उदाहरण के लिए 4 करोड़ से अधिक लोगों ने 1870 से 1914 तक की अवधि में यूरोप में पलायन किया। इन सभी कारकों के परिणामस्वरूप ये समाज गरीबी कम करने और अपनी अर्थव्यस्थाओं में गैरकृषि गतिविधियों की भूमिका में वृद्धि करने में सफल रहा। दूसरी तफ विकासशील देशों के ज्यादातर हिस्सों में संभव नहीं हो पाया। उन आवश्यक परिवर्तनों के अभाव में ग्राम विकास योजनाओं का जो प्रभाव इन देशों पर पड़ा उनको कम करके नहीं आंका जा सकता। यह भी स्पष्ट है कि विकसित देशों में आर्थिक रूपांतरण की पद्धति विकासशील देशों के संबंध में दोहराई नहीं जा सकती, क्योंकि ऐतिहासिक परिस्थितियाँ आज की परिस्थितियों से बहुत भिन्न थी। इसका निष्कर्ष यह है कि विकासशील देशों के लिए ग्राम विकास की सुनिर्मित और स्पष्ट कार्यनीतियां अत्यंत आवश्यक है।