विशेष योग्यजन - Special Persons

विशेष योग्यजन - Special Persons

विशेष योग्यजन शब्द से तात्पर्य क्या है? जब किसी बालक को सीखने समझने में विशेष समस्या उत्पन्न होती है, तो वह बालक विशेष योग्यजन कहलता है। यदि कोई बालक सामान्य बच्चों की तरह देख नहीं सकता है, तो वह दृष्टिहीन विशेष योग्यजन कहलाएगा। इसी प्रकार विशेष योग्यजन मानसिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक अथवा शैक्षिक क्षेत्र में रेखांकित किए जा सकते हैं। जिन बच्चों में कोई भी विशेष योग्यता पाई जाती है वह विशेष योग्यजन कहलाता है। विशेष योग्यजन बच्चों का व्यवहार स्वभाव और शारीरिक संरचना प्रायः स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है। विशेष योग्यजन एक ऐसी अवस्थाहै, जो किसी भी व्यक्ति को किसी भी आयु में उसके सामान्य व्यवहार कार्य शक्ति विचार एवं भाषा को प्रभावित कर शारीरिक, मानसिक, समाजिक एवं भावात्मक असंतुलन पैदा कर देता है। विशेष योग्यजन वे हैं कि जो अपनी व्यक्तिगत, शरीरिक, मानसिक और समाजिक सीमाओं और परिस्थितियों के कारण अपना जीवन सामान्य रूप से बिताने में असमर्थ है।

वास्तवतः वे अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के कारण अपना सामान्य जीवन बिना किसी सहायता के नहीं बिता सकते और इस प्रकार असंतुलन एवं असामंजस्य उनके जीवन की विकट समस्याएं बन जाती है उनका व्यवहार एवं सामाजिक प्रकार्यात्मकता दूषित और कठिन हो जाती है और वे समाज पर भार बन जाते है। एक विकासशील, सजग और प्रजातांत्रिक समाज उनके विकास और पुनगंठन के उत्तरदायित्व से अपने आपको अलग नहीं रख सकता। इसीलिए उनके आर्थिक, सामाजिक विकास किसी भी प्रकार की असमानता एक अभिशाप है। वर्तमान कानूनों तथा सरकारी और गैरसरकारी क्षेत्र की विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों के बावजूद असमानताओं से ग्रस्त व्यक्तियों को सामाजिक सांस्कृतिक और दृष्टिकोणगत बाधाओं का सामना करना पड़ रहा रहा है। उनका सामाजिक बहिष्कार उपेक्षा, भेदभाव, अयोग्य व्यक्तियों के अधिकारों के बारे में बढ़ती हुई जागरूकता के बावजूद जारी है। यदि हम एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाना चाहते हैं, जो न्यायोचित, निष्पक्ष और असमरसतापूर्ण है। इसलिए हमें अपंगता की पारंपरिक अवधारणा को त्यागना होगा और वंचितों के समूह को समाज में उनका उचित स्थान दिलाना होगा।


भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15, धर्म, नस्ल, जाती लिंग वा जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है। यद्यपि अपंग व्यक्तियों का एक समूह के रूप में इसमें कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं है फिर भी सभी को एक संवैधानिक गारंटी प्राप्त है। विशेष योग्यता वाले व्यक्तियों के अधिकारों कि रक्षा करने के लिए हमारे देश में निम्नलिखित अधिनियम हैं।