जनजातीय परिवार तथा नातेदारी: Tribal Family and Kinship
जनजातीय परिवार तथा नातेदारी: Tribal Family and Kinship
जनजातीय भारत परिवारों की विविधता का प्रदर्शन करता है, क्योंकि विभिन्न जनजातियों में विभिन्न नियम तथा रिवाज पाए जाते हैं। परिवार के मुख्यत दो प्रकार हैं:
1) सरल अथवा केंद्रीय परिवार
2) बड़ा अथवा संयुक्त परिवार
स्त्री पुरुष तथा उनकी संतानों के आधारभूत समूह का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें परिवारों की सदस्य संख्या सीमित रहती है। बिरहोर, प्रिय, कोरबा, आदि जनजाति में पाया जाता है। यह केंद्र' निकट संबंधित नातेदारी के जुड़ने से विस्तृत हो जाता है तो इसे विस्तृत परिवार भी कहते है। परिवार के अन्य अनेक प्रकार, पिता अथवा माता के अधिकारों के आधार पर भी भारतीय जनजाति में पाए जाते है। अधिकतर मामलों में विवाह के बाद पत्नी अपने पति के माता-पिता के साथ रहती है। इस व्यवस्था को पतृक (पेट्रीलोकल कहते हैं। इसके उलट को मातृगृह निवासी (मेट्रीलोक) कहते हैं। खासी" जनजाति में परिवार समान्यतः महिला के द्वारा बनाया जाता है।
उसका पति अविवाहित बच्चे (लड़का एवं लड़की एवं उसकी विवाहित पुत्रियाँ तथा उनके पति भी उसके साथ होते हैं। इस तरह के परिवार में संपत्ति महिलाओं को वंशानुक्रम से मिलती हैजैसे माँ से पुत्री को पुत्री से दोहती को और इस तरह से आगे चलता है। इस व्यवस्था को मातृ वंशानुक्रम व्यस्था कहते हैं। पैतृक गृह निवासी के परिवारों में उत्तराधिकार पुरुष वंशानुक्रम से मिलता है जैसे पिता से पुत्र से पोते एवं इसी तरह आगे चलता है। इसे पितृसत्तात्मक कहते हैं।
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