जनजातीय समुदाय में विवाह के प्रकार - Types of Marriage in Tribal Community
जनजातीय समुदाय में विवाह के प्रकार - Types of Marriage in Tribal Community
एकविवाह (Monogamy) - विवाह का वह स्वरूप है, जिसमें एक पुरुष किसी एक समय में एक स्त्री से ही विवाह करता है। भारतीय जनजातियों का बहुसंख्यक वर्ग एक विवाह का पालन करता है। जैसे कमार जनजाति ऐसी अनेक जनजातियाँ एक विवाही हैं।
बहुविवाह (Polygamy) -
अर्थात एक से अधिक व्यक्तियों से विवाह, बहुविवाह के दो पक्ष है 1) बहुपत्नी विवाह (Polygamy)- अर्थात एक पुरुष का अनेक स्त्रियों से विवाह करना है। यह प्रकार नागा, गोंड, बैगा, टोडा, तुशाई मध्य भारत की अधिकांश ऑस्ट्रीयाड जनजातियों में पाया जाता है। 2) बहुपति विवाह (Polyandry)- अर्थात एक स्त्री का एक से अधिक पुरुषों से विवाह करना है। भारतीय जनजातियों में प्रकार बहुपति प्रथा प्रचलित है। जब अनेक भाई एक ही स्त्री से विवाह करते हैं, जैसे खासा और टोडा में है, हम भ्रातृत्व बहुपति प्रथा कहते हैं। दूसरा नीलगिरी पहाड़ियों के टोड़ा में पतियों में कोई निकट संबंध का होना आवश्यक नहीं है तथा पत्नी प्रत्येक पति के साथ कुछ समय बिताने के लिए जाती है। जब तक एक बी अपने पतियों में से किसी एक के पास रहती है दूसरों का उस पर कोई अधिकार नहीं होता। नावर बहुपति प्रथा इसी प्रकार की थी।
अधिमान्य विवाह तथा निषेध:-
ऐसा देखा जाता है कि एक और समाज कुछ विशिष्ट नातेदारों अथवा उसी अंतकुल अथवा गोत्र में यौन संबंध बना वैचारिक संबंधों को प्रोत्साहित करता हैकि दूसरी और यह कतिपय अन्य स्वजनों में वैवाहिक संबंधों को प्रोत्साहित करता है।
भारतीय जनजातियों में प्रचलित विवाहः
1) कजिन विवाह बची ममेरे फुफेरे भाई बहन में विवाह
1.1 काम कवन विवाह प्राता-भगिनि संतति विवाह
1.2 पैरेलल कजिन विवाह समानांतर चचेरे-मोत्तर भ्राता भगिनि संतति विवाह
2) देवर विवाह (लेवरेट)
3) साली विवाह (सारोरेट)
विधवा विवाह समान्यतः
सभी जनजातीय समुदायों में प्रचलित है। अगर एक विधवा अपने दिवंगत पति के भाई सेवा है, तो इसे 'नियोग' कहते हैं। युवागृह भारतीय जनजातीय संस्कृति की एक विशेषता युवागृह का प्रचलन है। इसे भिन्नभिन्न जनजाति के लोग भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते है। जैसे धमखुरिया गिटिओग, गोधुल इत्यादि हम सभी जानते हैं कि समाजकरण में सबसे पहली भूमिका परिवार की आती है। परिवार के बाद पड़ोसी की आती है, लेकिन जनजातियों में एक व्यक्ति किशोरावस्था प्राप्त कर लेता है, तो समुदाय के सदस्य होने के नाते उसे समुदाय की कला संगीत गौत, शत्र चालन इत्यादि के संबंध में उसे जानना जरूरी होता है। साथ ही समुदाय की सुरक्षा के उपायों को भी समझना उसके लिए अनिवार्य होता है। इसलिए जनजातीय गांवों में युवाओं को पारिवारिक जीवन सामुदायिक जीवन, कलात्मक जीवन एवं सुरक्षात्मक जीवन व्यतीत करने संबंधी ज्ञान अर्जित करने के लिए युवा गृहोंका निर्माण किया जाता है। यहां अविवाहित युवकों को आपस में बातचीत करने का पूरा अवसर मिलता है। गांव का कोई बरीय सदस्य उन पर नियंत्रण रखता है। उन्हें वह पारिवारिक एवं ग्राम जीवन के संबंध में शिक्षा देते हैं। यहां युवक गीतसंगीत, शस्त्र चालन इत्यादि का प्रशक्षिण पाते हैं। कुछ जनजातीय गांवों में युवकों तथा युवतियों के लिए एक ही युवागृह होता है। उसे द्विलिंगीय युवागृह(Bisexual Dormitory) के नाम से जाना जाता है तथा कुछ जनजातीय गांवों में युवकों एवं युवतियों के लिए अलपअलग युवागृह होता है। उसे एकलिंगीय युवागृह (Unisexual Dermitory ) कहा जाता है।
वार्तालाप में शामिल हों