महिला एवं बाल विकास - Women and Child Development

महिला एवं बाल विकास - Women and Child Development

हिंदू धर्म में स्त्रियों को आदि शक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। वेदों और उपविदों में महिलाओं से संबंधित अनेक विचार प्रस्तुत किए गए हैं जिनमें उन्हें श्रेष्ठ दर्शाया गया है। गौतम बुद्ध ने भी खिचों को सर्वोपरि माना है। धीर-धीर समय परिवर्तित हुआ और मध्यकालीन युग में महिलाओं की प्रस्थिति में पूर्णरूपेण परिवर्तन हो गया। इस परिवर्तन ने महिलाओं की पूरी छवि को ही बदलकर रख दिया। भारत प्राचीन समय से ही अपनी सांस्कृतिक विरासत परंपरा, सभ्यता, धर्म और भौगोलिक विशेषताओं के बहुप्रसिद्ध देश के रूप में जाना जाता है। वास्तव में भारत नाना प्रकार की प्रथाओं व रूढ़ियों का देश है।


यहाँ पर व्यक्ति से व्यक्ति के संबंध से परे परंपराओं कन्यादा महत्व दिया जाता है और महिलाओं को दोयम दर्जे का माना जाता है।