विश्व व्यवस्था - world order

विश्व व्यवस्था - world order

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति स्थापना के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए गए जिससे परिणामस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का निर्माण हुआ UNO. UNESCO UNDP WHO, तथा विश्व बैंक आदि इसी संदर्भ में बने वैश्विक संगठन है। इनके अपने अलगअलग उद्देश्य है, किंतु मूल उद्देश्य विश्व में संतुलन बनाए रखना है। इसके लिए वे लगातार कार्यरत रहते हैं। सूचना प्रणाली के विकास के बाद मानो पूरा विश्व सिमट गया है। इस कारण विभिन्न समाजों में आपसी मेल-जोल बढ़ गया है। विचारों के आदान-प्रदान में शीघ्रता आ गई है। इसका असर यह हुआ है किसमूचा विश्व एक व्यवस्था में बंध गया है। उदारीकरण निजीकरण तथा वैश्वीकरण के साथ पूरा विश्व एक दूसरे के साथ जुड़ गया है। इन सभी कारकों का असर आम लोगों पर पड़ना लाजमी है।


हम देखते हैं, वैश्विक स्तर पर होने वाले बदलाओं का असर भारत के विभिन्न समूहों पर भी पड़ने लगा है। उदाहरण के लिए समलैंगिकता का मामला देखते हैं। इसके बारे में विश्व भर में विभिन्न देशों में समलैंगिकता को कानून के अंतर्गत मान्यता मिल रही है। इसका असर हम भारत में भी देखते हैं। भारत में भी यह मांग उठ रही है कि समलैंगिकता को कानून के तहत अनुमति प्रान की जाए दूसरे मामले में हम देखते हैं कि विकिलीक्स द्वारा दुनियाभर के भ्रष्ट नेताओं की सूचि सामने आने के पञ्चात भारत में भष्टाचार विरोधी आंदोलनों को प्रेरणा मिली और ठंडे बसते में पड़े लोकपाल को पुनर्जीवित किया गया परिणामतः लोकपाल विधेयक पारित हुआ। ऐसे कई सारे मामले हैं, जिसके संदर्भ वैश्विक व्यवस्था के साथ जुड़ते हैं।