बाल अपराध - Child Crime
बाल अपराध - Child Crime
बाल अपराध एक सामाजिक समस्या के रूप में समाज की सबसे बड़ी समस्या हो सकती है, क्योंकि बच्चे देश के भविष्य होते हैं। ऐसे में देश का भविष्य माने जाने वाले बच्चे किशोर अगर आपराधिक पृष्ठभूमि से हो तो देश की सामाजिक परिस्थिति खतरे में पड़ जाएगी। ऐसे में बाल अपराध को एक अलग दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता महसूस होती है। गिलीन एवं गिलौन (GilinandGilin) के अनुसार समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से एक अपराधी या किशोर वह होता है, जिसके कार्य को समूह द्वारा गिरा हुआ समझा जाता है और जो हानिकर होने के नाते निषिद्ध है."
रैंकलस (reckless) के अनुसार-बाल अपराध शब्द आपराधिक संहिता के उल्लंघन पर अथवा व्यवहार संरूपण के उस अनुसरण पर लागू होता है जिसे बच्चों या वयस्को द्वारा अच्छा नहीं समझा जाता है।"
अमेरिका में राष्ट्रीय परिवीक्षा समिति (Nationalprobation Committee) ने बाल अपराधी की परिभाषा निम्न प्रकार से दी है. बाल अपराधी वह है, जिसने
1. किसी प्रांत अथवा इसके क्षेत्र के कानून अथवा मान्यता का उल्लंघन किया हो।
2. जो सुधार से परे उदंड तथा अवज्ञाकारी हो और अपने माता-पिता, संरक्षक अथवा कानून अधिकारियों के नियंत्रण से परे हो।
3. जिसको स्कूल से अनुपस्थित रहने की आदत पड़गई हो
4. जो इस प्रकार का व्यवहार करता हो, जिसमें जानबूझकर स्वयं उसकी या अन्य व्यक्तियों की नैतिकता अथवा स्वास्थ्य को हानि पहुंचती हो।
बाल अपराध का उनके कृत्यों के आधार पर वर्गीकरण किया गया है, जिसमें लोबेल जे कार J. Carr) का बाल अपराधियों के संबंध में किया गया वर्गीकरण महत्त्वपूर्ण है।
1. किसी किशोर न्यायालय द्वारा दोषी पाए गए बाल अपराधी (Lowell
2. किसी समाज-विरोधी व्यवहार के लिए किशोर न्यायालय के सम्मुख पेश किए गए बाल अपराधी
3. किसी संस्था द्वारा समाज-विरोधी व्यवहार करने के लिए दंडित बाल अपराधी
4. समाज विरोधी व्यवहार के लिए किसी संस्था के सम्मुख पेश किए गए बाल अपाघी
5. समाज-विरोधी व्यवहार करने की प्रवृत्ति वाले बाल अपराधी
6. कानून द्वारा निर्धारित आयु के समस्त बाल अपराधी
बाल अपराध सुधारात्मक सेवाओं के क्षेत्रों में से एक है जिस पर तत्कस ध्यान देना आवश्यक है। भारतीय दंड संहिता के अनुसार बाल अपराधी को उम्र के आधारसर व्याख्यायित किया गया है। 7 वर्ष से 21 वर्ष पहले नियत किया गया था, जो फिलहाल 18 वर्ष पर सीमित किया गया है। बाल अपराध बच्चों द्वारा अनोपचारिक तरह से किया गया आपराधिक व्यवहार या असामाजिक कृत्य के रूप में परिभाषित किया जाता है। बाल अपराध के मुख्य कारणों में आम तौर पर परिवार से बच्चों का वंचित होना तीव्र समाज-आर्थिक परिवर्तनों के दबाव में व्यक्ति और परिवारों का शहरों की ओर पलायन, शहरों के अगल बगल बसने वाली मलीन बस्तियों के उभार के साथ बच्चे अधिकतर इस मामले में भेदतापूर्ण (Vulnerable) बनते जा रहें हैं। बाल अपराधियों की इजी मनों की लालसा, साहसिकता एवं मौज और प्रेम की उत्तेजना आदि रास्ते इन्हें अपराध तक पहुंचाते हैं। वचन की स्थिति में बाल्यावस्था सामाजिक उद्रेक को बढ़ावा देती है जिसके कारण मनोवैज्ञानिक एवं मानसिक दबाव पैदा होता है इसका सीधा संबंध अपराध से है।
बाल अपराधी तीव्र गति से आने वाले परिवर्तनों के दबाव में जीवन यापन कर रहे परिवारों एवं इन सामाजिक परिस्थितियों के शिकार हो जाते हैं। बाल अवस्था में अपरिपक्वता, कानून की अज्ञान होने के कारण उत्तेजित व्यवहार आकस्मिक रूप से अपराध में बदल जाते हैं। ऐसे में दंड उचित नहीं होगा लेकिन उनके चारित्रिक पुनर्गठन के लिए सुधारों की आवश्यकता है। ऐसे में सामाज कार्य का यह उत्तरदायित्व है कि बाल अपराधियों को यथोचित वांछित विकास में सेवा सदस्यता प्रदान करें।
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