विशेष योग्यजनों को संवैधानिक एवं विधिक संरक्षण - Constitutional and legal protection to special persons
विशेष योग्यजनों को संवैधानिक एवं विधिक संरक्षण - Constitutional and legal protection to special persons
भारत सरकार ने विशेष योग्यजनों के लिए निम्नलिखित कानूनों को लागू किया है जो इस प्रकार हैं: > निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995, धारा 2(न), (जिसे पीडब्ल्यूडी अधिनियम 1995 के रूप में भी जाना जाता है) विकलांग व्यक्ति कोष ऐसे व्यक्ति को रूप में परिभाषित करता है, जो किसी चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा यथा प्रमाणित किसी विकलांगता से न्यूनतम 40 प्रतिशत पीड़ित है। यह विकलागता (क) दृष्टिबाधिता (ख) कम दृष्टि (ग) कुष्ठ रोग उपचारित (प) श्रवण बाधिता (ङ) चलन विकलांगता (च) मानसिक रोग (छ) मानसिक मंदता (ज) स्वलीनता (ऑटिज्म) (झ) प्रमस्तिष्क अंगघात अथवा (अ) (छ), (ज़) और (झ) में से दो या अधिक का संयोजन हो सकता है। ऐसे लोगों को शिक्षा, रोजगार, अवरोधमुक्त वातावरण का निर्माण सामाजिक सुरक्षा इत्यादि प्रदान करता है।
> ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी, मानसिक मंदबुद्धिवहुविकलांगता के लिए राष्ट्रीय कल्याण ट्रस्ट अधिनियम 1999 में चारों वर्गों के कानूनी सुरक्षा तथा उनके स्वतंत्र जीवन हेतु सहसंभव वातावरण के निर्माण का प्रावधान है।
भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम 1992 पुनर्वास सेवाओं के लिएमानव-बल विकास का प्रयास करता है। आयकर अधिनियम, 1961 के अनुच्छेद 80 यू एवं 80 डी के अंतर्गत विकलांगों को छूट दी गई है।
> मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 के अंतर्गत भी विशेष योग्यजनों के संरक्षण हेतु कुछ प्रावधान किए गए है। इस के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है
1) स्वैच्छिक रूप से इलाज करवाने हेतु इच्छित ज्ञान न रखने वाले एवं इलाज के दौरान निरुद्ध किए गए मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को मनोचिकित्सालयों एवं नर्सिंग गृहों में भर्ती को नियमित करना एवं इनके अधिकारों को संरक्षित करना।
2) मानसिक रूप से अस्वस्थ्य व्यक्तियों से समाज का संरक्षण करना।
3) मनोचिकित्सालयों एवं नर्सिंग गृहों में बिना किसी वांछिनीय कारण के निरुद्ध नागरिकों को संरक्षण प्रदान करना।
4) मनोचिकित्सालयों एवं मनञ्चिकित्सकीय नर्सिंग गृहों में भर्ती हुए मानसिक रोगियों के अनुरक्षण शुल्कों के उत्तरदायित्व को नियमित करना।
5) अपने कार्यों के कारण में असमर्थ मानसिक रोगियों के लिए संरक्षकत्व की सुविधा उपलब्ध कराना।
6) मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केंद्रीय प्राधिकरण एवं राज्य प्राधिकारियों की स्थापना कराना।
7) मानसिक रोगियों के लिए स्थापित होने वाले मनश्चिकित्सकीय अस्पतालों एवं मनश्चिकित्सकीय नर्सिंग गृहों को लाइसेन्स देने एवं इन पर नियंत्रण करने की शक्तियों को नियंत्रित कराना।
8) कुछ विशिष्ट प्रकार के मानसिक रोगियों को राज्य के खर्च पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
यह कानून सारे भारतवर्ष पर लागू है इस कानून के अंतर्गत मानसिक रोगियों के संरक्षण अथवा अन्य व्यक्तियों द्वारा मानसिक रोगियों के इलाज के लिए स्थापित मनश्चिकित्सकीय अस्पताल एवं मनश्चिकित्सकीय नर्सिंग गृह एवं मानसिक रोगियों के स्वास्थ्य लाभ हेतु स्थापित गृह आते हैं।
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