वृद्धों की संवैधानिक सुरक्षा - Constitutional Protection of The Elderly

वृद्धों की संवैधानिक सुरक्षा - Constitutional Protection of The Elderly

अगर वे बहुत पहले से जिस आवास में रह रहें है ऐसे माता-पिता को उनके आवास से बिना विहित विधिक प्रक्रिया के नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए सीआरपीसी, भरण-पोषण अधिनियम एवं घरेलू हिंसा अधिनियम में प्रावधान किए गए हैं। सीआरपीसी की धारा 125 के अनुसार सक्षम न्यायाधीश माता-पिता के भरण पोषण प्रावधान के अंतर्गत संतान को उनके माता-पिता की देखभाल की आज्ञा दे सकते हैं। हिंदू उत्तराधिकार और भरणपोषण अधिनियम के अनुसार वरिष्ठ माता-पिता अपनी संतान से वैसे ही रख-रखाव की मांग कर सकते हैं जैसे कि एक पत्नी अपने पति से रखती है।

वृद्ध व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद् सन 1999 की राष्ट्रीय वृद्धजन नीति में इस राष्ट्रीय परिषद् के निर्माण का स्रोत हैं। 1999 के राष्ट्रीय वृद्धजन नीति के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए इस परिषद् का गठन किया गया। यह परिषद् वृद्धों के लिए नीति तैयार करने और उनके लिए कार्यक्रम तैयार करने तथा उसके क्रियान्वयन में सरकार को सलाह देने के लिए सर्वोच्च संस्था है। वर्ष 2005 में परिषद् में केंद्र और राज्य सरकारों को शामिल कर फिर से गठित किया गया। इसके सदस्यों में गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि नागरी समूह, सेवानिवृत्त व्यक्तियों, संघों और कानून समाज कल्याण और चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल व्यक्तियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वृद्ध कल्याण के लिए कार्यक्रम वृद्ध व्यक्तियों की विभिन्न आवश्यकताओं के पूर्ति के लिए 992 के बाद से एकीकृत कार्यक्रमों को लागू किया जाने लगा। इसके माध्यम से सरकारी संगठनों गैर-सरकारी संगठनों पंचायत राज संस्थाओं स्थानीय निकायों तथा समुदाय में बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण का प्रयास किया गया।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों को वृद्धाश्रम डे केयर सेंटर और मोबाइल चिकित्सा इकाइयों के लिए परियोजना लागत की 90 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस योजना को 2008 में संशोधित कर राशि में वृद्धि तथा नवीन परियोजनाओं को इसमें जोड़ा गया। वर्ष 2007-08 के दौरान देशभर के पचास हजार के आसपास लाभार्थियों को 660 कार्यक्रमों की सहायता से 16 करोड़ रूपए खर्च कर लाभान्वित किया गया। इसके अलावा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों जैसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ग्रामीण विकास, रेलवे, वित्त, नगर विमानन पेंशन और पॅशनभोगी शिकायत इत्यादि विभागों ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाभ के लिए स्वयं विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया। साथ ही 15 अगस्त 1995 में शुरू राष्ट्रीय सहायता कार्यक्रम, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना जैसी • योजनाएँ संशोधन के बाद लगातार वृद्धों के कल्याण के लिए चलाई जा रही है।

भारत में वृद्ध जनसंख्या लगातार बढ़ती हुई नजर आती है। आँकड़े बताते हैं कि2001 में भारत में वृद्ध जनसंख्या 7.4 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 8.0 हो गई है। इस लगातार बढ़ने वाली वृद्ध जनसंख्या को सभी सुविधाएँ प्रदान करने की क्षमता भारत जैसा विकासशील देश नहीं रखता। वृद्धों की सभी समस्याएँ प्राथमिकता वाली होने के कारण उनके किसी भी समस्या को अनदेखा नहीं किया जा सकता। ऐसे में विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत उनकी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश जारी है।