अपराधी सुधार प्रशासन - Criminal Reform Administration
अपराधी सुधार प्रशासन - Criminal Reform Administration
बीसवीं सदी में समाज में काफी परिवर्तन आए शायद इसीलिए इसे कुछ विद्वान सुधार का युग भी कहते हैं। इस समय में प्राचीन व्यवस्थाओं में पाए जाने वाले दोषों को कम करने का कार्य बड़े पैमाने पर हुआ। अपराधी सुधार इसी समय की अवधारणा है। अपराधी सुधार से तात्पर्य है कि एक बार अगर कोई अपराधी अपराध कर लेता है, तो उसका इस तरह से उपचार किया जाना चाहिए कि वह फिर से उस रास्ते पर न जाए। प्राचीन व्यवस्था में केवल दंड का प्रावधान था और अपराधी के माथे पर अपराध एक कलंक के रूप में था, जिसे समाज कभी भुलाने नहीं देता था। विचारधारा के स्तर पर आए वैश्विक बदलाओं ने अपराधी तथा अपराध दोनों को पुन परिभाषित करने की दिशा प्रदान की, जिसके फलस्वरूप अपराध के स्थान पर अपराधी को महत्व दिया जाने लगा। दंड की जगह उपचार और साथ ही उसके समाज में पुनर्वास पर जोर दिया जाने लगा। सन 1957 में बनी फ़िल्म दो आँखें बारह हाथ इसी बदलाव का परिचायक थी।
ऐसे में अपराधियों को समाज में फिर से समायोजित करने के लिए अपराधी सुधार कार्यक्रम की आवश्यकता महसूस की जाने लगी इसी के पूर्ति के लिए अपराधी सुधार प्रशासन की शुरुआत होती है। समाज कार्य से संबंध रखने वाले दो दिवाकर अपराधी सुधार प्रशासन के बारे में लिखते हैं कि अपराधी सुधार के अंतर्गत वे समस्त कार्यक्रम सम्मिलित हैं जिनके द्वारा राजी स्वयं अथवा स्वैच्छिक प्रयासों से अपराध निरोध एवं अपराधी न्याय व्यवस्था की संपूर्णव्यवस्था के अंतर्गत उन व्यक्तियों को पुनर्लाभ पुनर्शिक्षा एवं पुनर्वास के प्रयास करता है जिन्हें विधि संहिता का उल्लंघन करने पर दंड प्राप्त हैं।जे. जे. पनाकल (1968) तथा इलियट स्टड (1964) जैसे समाज कारी के सुधार सेवाओं (Correctional service) से संबंध रखने वाले विद्वानों का मानना है कि अपराधी सुधार प्रशासन की आधुनिक अवधारणा में सुधार का अर्थ है अपराधी व्यक्ति को कानून का पालन करने वाले नागरिक की भाँति जीवनयापन योग्य बनाना तथा सुधार वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा आधुनिक समाज के कानून तोड़ने वाले व्यक्तियों की आपराधिक मनोवृत्ति में परिवर्तन लाने तथा उनकी जीवन शैली को सामाजिक नियमां के अनुरूप दालने का प्रयत्न करना है।
अपराधियों के सुधार हेतु भारत में अनेक सुधार संस्थाएँ हैं जिनमें प्रमुख रूप से है पुलिस, न्यायालय तथा जेल यह सभी सरकारी अभिकरण हैं, बावजूद इसके अनेक संस्थाएँ स्वैच्छिक प्रयास से भी अपराधी सुधार का कार्य करती है। इन सभी अभिकरणों में अपराधियों के सुधार की व्यवस्था के लिए जेल एक उचित अभिकरण माना जाता है। जेल बदले हुए स्वरूप में अपने आप में एक अलग समाज है। इस लिए यहाँ पर अपराधियों के सुधार हेतु विभिन्न कार्य किए जाते हैं, जिसमें एक खास प्रशासन की आवश्यकता होती है। अपराधी सुधार प्रशासन से संबंधित कार्यक्रम दो प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित हैं।i
1. व्यक्ति के विचलित व्यवहार एवं दृष्टिकोण में ऐसी सहायता प्रक्रिया द्वारा परिवर्तन करना जो उसके व्यक्तिगत एवं सामाजिक समायोजन में सहायक हो।
2. व्यक्ति के पर्यावरण तथा परिस्थितियों में परिवर्तन तथा संशोधन द्वारा अनेक प्रकार के निरोधात्मक एवं सुधारात्मक साधनों की उपलब्धि करना जो उसमें अपराधिता को जन्म देती हैं।
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