राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्य - Functions of National Commission for Backward Classes

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्य - Functions of National Commission for Backward Classes

> अन्य पिछड़ा वर्ग के सूचियों में नागरिकों के किसी वर्ग को पिछड़ा वर्ग के रूप में शामिल करने के अनुरोध की जांच करेगा और इस सूची में किसी अधिक समावेशन या कम समावेशन की शिकायतों की सुनवाई करेगा और केंद्र सरकार को ऐसी सलाह देगा जिसे वह उचित समझे। इस आयोग की सलाह समान्यतः केंद्र सरकार पर बाध्यकारी होगी।


केंद्र सरकार को इस अधिनियम के लागू होने से दस वर्ष की समाप्ती पर और उसके बाद अगले से प्रत्येक दस वर्ष की समाप्ती पर पिछड़ा वर्ग की सूचियों के संशोधन का कार्य करने का आदेश दिया गया है। इन सूचियों से उन वर्गों को हटाने जो पिछड़ा वर्ग नहीं रह जाते अथवा इस सूची में नए पिछड़े वर्गों को शामिल करने के दृष्टिकोण से किसी भी समय इन सूचियों को संशोधित करने की शक्ति प्रदान की गई है। केंद्र सरकार के लिए इन सूचियों का संशोधन करते समय आयोग से सलाह लेना आवश्यक होगा। 


• आयोग को विशेष तौर पर भारत के किसी भी भाग में किसी व्यक्ति को समन करने और उसकी उपस्थिति को अनिवार्य करने और शपथ दिलाकर उससे पूछताछ करने किसी दस्तावेज का पता लगाने और उसे पेश करने के लिए कहने शपथपत्र पर साक्ष्य प्राप्त करने, गवाह से पूछताछ करने और दस्तावेज प्राप्त करने के लिए नोटिस जारी करने और किसी भी अन्य मामले, जो निर्धारित किए जाएं, के संबंध में बाद का परीक्षण करने वाले सिविल न्यायालय की शक्तियाँ प्राप्त है।


> आयोग प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा साथ ही आयोग द्वारा दी गई सलाह पर की गई कारबाई के ज्ञापन और इनमें से कोई सलाह स्वीकार नहीं की जाती है तो उसके कारण और लिखित परीक्षा रिपोर्ट के साथ केंद्र सरकार द्वारा संसद के दोनों सदनों के समक्ष पेश की जाएगी।


•आयोग की सलाह एकमत से या सर्वसम्मति से या बहुमत से तैयार की जाए। यदि एकमत या सर्वसम्मति नहीं बनती है, तो बहुमत की सलाह आयोग की सलाह के रूप में दी जाएगी, लेकिन विसम्मति सूचक सलाह भी सरकार को भेजी जाएगी।


राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग वास्तव में आने के बाद निम्नलिखित कदम उठाए है


> पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में पिछड़े वर्गों शामिल करने के अनुरोध और सूची में अधिक समावेशन या कम समावेशन की शिकायतों की जांच की प्रक्रिया तैयार की गई थी।


• केंद्रीय सूची में पिछड़े वर्गों को शामिल करने के अनुरोध औरकम समावेशन की शिकायतों पर विचार के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए थे।


• जातियों समुदायों को शामिल करने के अनुरोध के संबंध में आंकड़े प्राप्त करने के लिए प्रश्नावली तैयार की गई थी। 


•आयोग अनुभव और आवश्यकता के आधार पर समय-समय पर इस प्रक्रिया में संकलन और सुधार करता आ रहा है।


राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। पिछड़े वर्गों से संबंधित कल्याण और शिकायत के मुद्दे को देखने की शक्ति अभी भी संविधान के अनुच्छेद 338 की खंड (10) के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को सौंपी गई है। परिणामस्वरूपराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास पिछड़े वर्गों से संबंधित कल्याण और शिकायत के मुद्दे को देखने की शक्ति नहीं है। वर्तमान में इसकी भूमिका केवल अन्य पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में जातियों के समावेशन और अपवर्जन तक सीमित है।