स्वास्थ्य शिक्षा एवं शोध - Health Education & Research
स्वास्थ्य शिक्षा एवं शोध - Health Education & Research
इन पक्षों पर कार्य करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन करता है। निदानात्मक पक्ष के अंतर्गत कार्य करते हुए वह रोगी के रोग और उस रोग के कारण उसके सामाजिक मानसिक क्रिया-कलापों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करता है तथा उन्हें रोगी या रोगों के परिवार के सामने रखता है। उपचारात्मक पक्ष के अंतर्गत कार्य करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता परामर्श सामाजिक चिकित्सा, समूह चिकित्सा इन विधियों का उपयोग करता है। इन विधियों का उपयोग वह रोगी की समस्या एवं कठिनाई की प्रकृति रोगी द्वारा बांछित सहायता प्रकार तथा चिकित्सालय में उपलब्ध साधनों के बीच समायोजन स्थापित करने में करता है। निवारक आयाम के अंतर्गत कार्य करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मुख्यत दो प्रमुख मुद्दों पर कार्य करता है.
1. व्यक्ति का स्वास्थ्य संरक्षण
2. समुदाय का स्वास्थ्य संरक्षण
सामाजिक कार्यकर्ता रोगों से बचाव, रोगों का शीघ्र निदान एवं उपचार तथा रोग से उत्पन्न अशक्तता एवं अक्षमता से संरक्षण प्रदान करना आदि में सहयोग प्रदान करता है। इसके लिए वह रोगी रोगी का परिवार • तथा चिकित्सालय प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करता है। रोग के कारण रोगी की कार्यक्षमता में हास एवं सामाजिक अनुकूलन में कुसमायोजन स्पष्ट रूप से प्रकट होता है। इस अवस्था में रोगी के रूप में व्यक्ति पुनर्स्थापना की माँग रखता है। सामाजिक कार्यकर्ता रोगी के शारीरिक व्यवसायिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक पुनर्स्थापना में अपना सहयोग तथा सेवाएं प्रदान करता है।
संस्थागत ढाँचे में या स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफ़ी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे में उनका चिकित्सालय के सभी कर्मियों तक संचारण होना आवश्यक होता है। प्रदर्शन वार्तालाप, कार्यशाला एवं व्याख्यान के अंतर्गत सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षक की भूमिका अदा करता है और उन समस्याओं के समाधान पर विचार विमर्श करवाता है। इसके साथ ही नए ज्ञान के निर्माण में वह अपनी जिम्मेदारी निभाता है जैसे चिकित्सालय में किसी एक परिस्थिति में समाज कार्य के हस्तक्षेप से संबंधित अध्ययन करना तथा रोगी की बीमारी से संबंधित सामाजिक कारकों के प्रभाव का एवं बीमारी के विभिन्न चरणों से संबंधित अध्ययन करना।
वार्तालाप में शामिल हों