भारत की स्वास्थ्य प्रोफाइल - Health Profile of India

भारत की स्वास्थ्य प्रोफाइल - Health Profile of India

भारत को विकासशील देश के रूप में देखा जाता है। आज भी यहाँ के कई सारे लोग पारंपारिक चिकित्सा प्रणाली पर अपने स्वास्थ्य को प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत आज भी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाता के रूप में काफी पिछड़ा है। वर्ष2013 के आंकड़े बताते हैं की पूरे देश में जीवन प्रत्याशित आयु 66 है, जिसमें से स्वस्थ जीवन प्रत्याशा आयु केवल 57 वर्ष बताई जा रही है। काफी प्रयासों के बाद मातृ मृत्यु दर प्रति लाख व्यक्तियों में 190 हुआ है। पाँच वर्ष की आयु के बच्चों का मृत्यु दर प्रति हजार में 50 के आस-पास है। टी. बी. के रोगियों की संख्या प्रति लाख व्यक्तियों में 230 ऑकी गई है। साथ ही मलेरिया की संख्या 1523 बताई गई है।

वर्ष 2001-03 में की गई मिलियन डेथ स्टडि (Million Death Study) के अनुसार भारत में मृत्यु के कारणों की खोज की गई थी, जिसमें यह दिखाया गया है कि 38 प्रतिशत लोग संचारित बीमारियों के शिकार हुए, 42 प्रतिशत लोग असचारित-बीमारीयों के शिकार हुए 10 प्रतिशत लोग चोटिल या घायल होने के कारण मरे तथा बाकी 10 प्रतिशत लोग अन्य कारकों से कारण मृत्त हुए। इससे साफ पता चलता है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के कमी के कारण भारत में आज भी लोगों की मौतें हो रही हैं। इसके कारणों पर बात करें तो कुछ आँकड़े समाने आ जाते हैं। उदाहरण के लिए, जैसे भारत में स्वास्थ्य वर्कफोर्स के आँकड़े कुछ इस प्रकार हैं- प्रति दस हजार लोगों पर 7 फिजीशियन कार्यरत है, तथा नर्स और मिडवाइफ की संख्या 17.1 बताई जा रही है।

अर्थात लगभग 1428 लोगों पर एक फिजीशियन तथा 584 लोगों पर एक नर्स या मिडवाइफ इस समय में भारत में कार्यरत है। यह आंकड़ा सही में भारत की स्वास्थ्य दशा की दयनीयता को उजागर करता है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) के रुरल हेल्थ स्टेटिस्टिक्स-2012 के अनुसार भारत में 148366 उप-केंद्र, 24049 प्राथमिक आरोग्य केंद्र और 4833 सामुदायिक विकास केंद्र कार्यान्वित हैं।