तृतीय पंथी जन के लिए भारतीय गैर-सरकारी संगठन - Indian Non-Governmental Organization for Third Gender People
भारतीय गैर-सरकारी संगठन
नाज इंडिया ट्रस्ट
नाज फाउंडेशन 1994 से एच.आई.वी. एड्स और यौनिक स्वास्थ्य पर कार्य करने वाली संस्था है। इसका मुख्य कार्यालय दिल्ली में है। मुख्य उद्देश्य एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित करना तथा संक्रमित लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराना है। साथ ही इसका उद्देश्य समुदाय को अन्य यौनिकता एवं यौनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों से अवगत कराना है। धारा377 के खिलाफ 2001 से मुकदमे में मुख्य भूमिका नाज फाउंडेशन की ही रही है।
संस्थापक अंजलि गोपालन नाज फाउंडेशन की संस्थापक तथा वर्तमान कार्यकारी निदेशक है। उन्होंने एच.आई.वी. प्रभावित लोगों के साथ काम करने की शुरुवात अमेरिका से की। बाद में जब वे भारत आई तो उन्होंने यहाँ एच.आई.वी मरीजों की स्थिति उसकी बढ़ती हुई संख्या तथा इसके प्रति सरकार और समाज के रवैये को देखकर निराश हुई। उनकी प्रतिक्रिया नाज इंडिया के रूप में सामने आईजो समाज में कलंकित लोगों के साथ काम करें। इसके मुख्य कार्यक्रम निम्नलिखित हैं
• एमएसएम कार्यक्रम ऐसे लोग, जो समलैंगिक हैं, उनके स्वास्थ्य को लेकर उनके बीच काम करना।
ड्राप इन सेंटर(Drop in center)
इसके अंतर्गत एमएस एम. और ट्रांसजेंडर लोगों के साथ बातचीत, परामर्श, टेलीफोन द्वारा परामर्श, विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना है। गृह आधारित देखभाल- इसके अंतर्गत प्रभावित लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं परिवार के लोगों द्वारा उत्साह वर्धन, मनोवैज्ञानिक परामर्श, वैधानिक समर्थन और क्षमता निर्माण वाले कार्यक्रमों को पहुंचाना है साथ ही रोजगार के लिए भी प्रयास किए जाते हैं।
समूह शिक्षर Pecr Education)
इसके अंतर्गत विभिन्न विश्वविद्यालयों व कालेज के युवकों को यौनिक स्वास्थ्य तथा यौनिक अधिकारों के मुद्दों पर प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे इस जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाए।
केयर होम (Care Home)
भारत में दुनिया का एक बहुत बड़ा जनसंख्या एचआई. वी. अनाथ बच्चों की है, और यह लगातार बढ़ रही है। इन बच्चों को विभिन्न मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। 2001 से नाज इंडिया अनाथ बच्चों के साथ काम कर रही है। केयर होम के सभी बच्चों को स्वास्थ्य, शिक्षा, एक सुरक्षित और कलंक मुक्त वातावरण व प्यार व मस्ती भरा बचपन मिले, इन मौलिक अधिकारों के सिद्धांत का पालन करते हुए इसकी स्थापना की गई।
प्रशिक्षण, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण और शिक्षा का कार्य किया जाता है। साथ ही नाज़ इंडिया विभिन्न समूहों की कार्यक्रम में भी भाग लेती है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सामाजिक चुनौतियों के लिए जागरूकता फैलाना है।
छत्तीसगढ़ मितवा संकल्प समिति
छत्तीसगढ़ मितवा संकल्प समिति का गठन 12 नवंबर 2009 को ट्रांसजेंडर किन्नर तथा कोधियों के समस्याओं को देखते हुए किया गया। यह संस्था अपने आप में महत्वपूर्ण इसलिए है कि इससस्था के सभी सदस्य ट्रांसजेंडर किन्नर व कोथी में से ही है। इसकी मुख्य कार्यालय रायपुर कुशालपुर में है। रायपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में भी इसकी शाखा है। मितवा संकल्प समिति के अनुसार राज्य में थर्ड जेंडर लोगों की संख्या लगभग 10 हजार है।
मुख्य उद्देश्य
आर्थिक रूप से सशक्त करने व रचनात्मक कार्य हेतु प्रोत्साहित करना
•कानूनी अधिकारों की जानकारी एवं नए कानून के लिए पैरवी करना
*स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता व सुविधाएं प्रदान करना
सामाजिक असमानता को दूर करना
इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संगठन निम्नलिखित क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है
• ज़्यादातर थर्ड जेंडर घर से निकाल दिए जाते हैं, ऐसे में इन्हें शासकीय योजनाओं द्वारा आवास प्राप्ति में मदद की जाए।
● थर्ड जेंडर कल्याण प्रकोष्ठ के लिए कानूनी पैरवी करना। यह प्रकोष्ठ शिक्षा स्वास्थ्य, विवाह, सामाजिक मान्यता, रोजगार प्रशिक्षण व अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को भी संपादित करना।
• संगठन की उचित संचालन तथा संसाधन इकट्ठा करने के लिए इसे विभिन्न सरकारी गैर-सरकारी संस्थाओं से इसे जोड़ा जा रहा है।
• गरीबी कार्ड, स्मार्ट कार्ड और पेंशन कार्ड का लाभ दिलाने हेतु संबंधित विभागों में जाकर ज्ञापन सौंपा जा रहा है। इसके साथ ही इनके सेक्स वाले विकल्प में अन्य को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
• समुदाय के सदस्यों के लिए रोजगारन्मुखी प्रशिक्षण व विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
● बच्चों में घई जंडर समुदाय के प्रति जागरूकता फैलाने व यौनिकता संबंधी सकारात्मक विकास
लिए इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
• समुदाय के लोगों को जिन अपशब्दों से संबोधित किया जाता है उस पर रोक लगाने के लिए प्रयास
● सरकारी नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था के लिए मांग की जा रही है ताकि समाज में ये भी सर उठाकर अपना जीवनयापन कर सके।
• समुदाय को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए एचआईवी एड्स गुप्त रोग व अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जा रहा है तथा इन
• बीमारियों से संबंधित जागरूकता बढ़ाने के लिए आई सी सामग्री व व्यक्तिगत स्तर पर सहयोग किया जा रहा है।
है हमसफर ट्रस्ट समुदाय आधारित संगठन है जो ऐसे लोगों के लिए है, जिसे हमारा विषमलैंगिक समाज पसंद नहीं करता इसके साथ ही समुदाय के लोगों को जागरूक तथा उनके क्षमता निर्माण के लिए परामर्श दिया जाता है। इसका गठन अप्रैल 1994 में समलैंगिक पुरुषों के द्वारा किया गया जो मुंबई और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले समलैंगिक लोगों को जोड़ना चाहते थे। बीते कुछ वर्षों में एल. जी.बी.टी. लोगों को मिली स्वीकार्यता राजनीतिक पैरवी, सामुदायिक भागीदारी तथा जागरूकता से संभव हो पाया है। हमसफर ट्रस्ट के अंतिम लक्ष्य एलजी. बी. टी. लोगों के साथ सभी प्रकार के भेदभाव को खत्म करना है। यौनिकता पर एक तर्कसंगत नजरिए का विकास भी एक प्रमुख उद्देश्य है।2001 से धारा 377 पर भी
हमसफर
पैरवी का काम कर रही है।
संस्थापक 'मि. राव कवि अमेरिका में से अधिकार पर काम करते थे अमेरिका में हो रहे इसको भारत में भी आगे बढ़ाने के लिए वे यहां आते हैं। वर्ष 1990 से ही उन्होंने अपने काम की शुरुवात करते हुए समुदाय के लोगों को जोड़ने का काम किया। पहला विचार उनके संबंध में समाचार पत्र निकालने को आया। उसके बाद उन्होंने बाम्बे दोस्त नाम से पत्रिका निकालने की शुरुवात की। धीरेधीरे यह संस्था समलैंगिक लोगों को अपनी सेवाएं प्रदान करने लगी और 1994 तक यह संस्था अपने व्यापक स्वरूप में आ गई।
हमसफर की तीन प्रमुख शाखाएँ है
1) समलैंगिक लोगों के लिए सुरक्षित और पोषक वातावरण तैयार करना
2) सामुदायिक कार्यक्रम
3) परामर्श
1) समलैंगिक लोगों के लिए सुरक्षित और पोषक वातावरण तैयार करना मुख्य रूप से एच.आई. बी. एड्स इसके संबंध में जानकारी दी जाती है साथ ही ऐसे लोगों के लिए उपचार की व्यवस्था भी की जाती है। इसी संबंध मेंबॉम्ब दोस्त, जो इंडिया की पहली गे पत्रिका 1989 में प्रकाशित हुई। सन 1995 में हमसफर के अंतर्गत ड्राप इन सेंटर का निर्माण किया गया जो एक चिकित्सालय की तरह काम करता है और समलैंगिक मुद्दों पर अनुसंधान करता है। आज हमसफर ट्रस्ट के अंतर्गत बहुत बड़े ड्रापिंग सेंटर अपनी सेवाएं मुहैया कराती है।
Quentin BurkleLibrary- यह 90 के दशक में शुरू हुई जिसके अंतर्गत बहुत सारी पुस्तकें पत्रिकाएं,
अनुसंधान पत्र और रिपोर्ट इत्यादि एल. जी. बी. टी. मुद्दों पर संग्रह की गई है। Hello dost- हमसफर के अंतर्गत हेलो दोस्त नए ड्राप झ सेंटर के रूप में बनाई गई, जिसके अंतर्गत संबंधित व्यक्तियों के लैंगिक समस्याओं का समाधान धार्मिक और मनोवैज्ञानिक विधि से परामर्श द्वारा की जाती है। ट्रस्ट के इस शाखा को हम लैंगिक समस्याओं का समाधान शाखा भी कह सकते है।
2) सामुदायिक कार्यक्रम सामुदायिक कार्यक्रम के अंतर्गत दूसरा सामुदायिक कार्यक्रम बनाया गया है जिसके अंतर्गत फ्राइडे बर्कशाप एक प्रभावी कार्यक्रम है जो पहली बार भारत में समलैंगिक लोगों के लिए चलाया गया। इसके अंतर्गत विविध प्रकार के शुक्रवारी कार्यशालाएं चलाई जाती है जिसमें एक से अधिक साथियों के साथ संबंध को रोकना आदि शामिल है। बिंगो हाउस के अंतर्गत विविध प्रकार के गीत और नृत्य का कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा समलैंगिक लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है।
3) परामर्श- यह सेवा 1995 से शुरू हुई इसे बाइस मेल हेल्प लाइन के नाम से जाना जाता है यह परामर्श आमने-सामने के संबंध के द्वारा तथा फोन के माध्यम से प्रदान की जाती है। विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें लैंगिक जानकारी तथा वैधानिक सहायता से संबंधित है।
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