वैयक्तिक मनोचिकित्सकीय समाज कार्य - Individual Psychotherapeutic Social Work
वैयक्तिक मनोचिकित्सकीय समाज कार्य - Individual Psychotherapeutic Social Work
मनोचिकित्सकीय समाज कार्य की परिभाषाओं से स्पष्ट है कि मनोचिकित्सकीय समाज कार्य में सहयोग बुनियादी विधि के रूप में वैयक्तिक सेवा कार्य को देखा गया है। इसी आधार पर यहाँ हम मानसिक रोगियों के साथ किए जाने वाले विभिन्न गतिविधियों पर प्रकाश डालेंगे।
मेरी जाहोडा (Mary jahoda) ने मानसिक रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति के पाँच मानदंड बनाएँ हैं:
1. मानसिक रोगों की अनुपस्थिति
2. व्यवहार की सामान्यता
3. परिवेश में समायोजन
4. व्यक्तित्व की एकता
5. वास्तविकता का ठीक-ठीक प्रत्यक्षीकरण
उक्त मानदंडों के आधार पर सामान्य व्यक्तित्व तो समझ में आता है, लेकिन असामान्यता एवं मानसिक बीमारी की पहचान करने के लिए अन्य प्रारूपों का उपयोग भी करना पड़ेगा।
1. मनोगत्यात्मक प्रारूप सिग्मंड फ्रायड
2. मानवतावादी प्रारूप मास्ता, रोजर्स आदि
3. अस्तित्ववादी प्रारूप - सोरेन किर्के. आर.डी. लंग आदि
4. अंतर वैयक्तिक प्रारूप- हेरी स्टेक सुलीवन तथा एरिल नें
उक्त चार प्रमुख प्रारूपों के बावजूद मनोविज्ञान के क्षेत्र में विभिन्न स्कूलों का निर्माण किया गया है, जिसके आधार पर सामान्यता एवं असामान्यता के बीच अंतर किया जाता है। मानसिक बीमारियों की पहचान करने में, डायग्नोस्टिक स्टैटिस्टिकल मेन्यूएल फॉर मेटल डिसॉर्डर (DSM-IV) काफ़ी मददगार है।
मानसिक रोग के उत्पत्ति में पर्यावरणीय और सामाजिक कारकों का उतना ही हाथ होता है, जितना की उस व्यक्ति का व्यक्तित्व, प्रेम का अभाव, मनो-आघात, तिरस्कार, अति लाइ प्यार, अवास्तविक आशाएँ प्रतिद्वंद्विता वंचना, विरोध, प्रतिबंध आशाओं के टूटन के कारण बनी स्थितियों दुर्घटना तथा रोग आदि महत्वपूर्ण कारक एवं कारण है जिससे मानवीय व्यवहार प्रभावित होते हैं। इन व्यवहारों का समायोजन न होने की लंबी अवधी में मानसिक बीमारी का उद्भव होता है। मन- शरीर समस्या के अंतर्गत देखे तो मनोचिकित्सामें रोगों का क्रम शरीर से मन और मन से शरीर की ओर माना जाता है। इसका मतलब है कि शारीरिक व्याधीयों से ग्रस्त होने के कारण भी कभी-कभी मानसिक बिमारियाँ उत्पन्न होती है जैसे कि पैर टूटने के बाद चलने में होने वाली तकलीफ या औरों पर निर्भर होना व्यक्तित्व विकार या व्यवहारिक विकार उत्पन्न कर सकता है।
समाजकार्य में मानसिक बीमारी से निबटान एवं सहयोग हेतु मनोचिकित्सकीय समाज कार्य के अंतर्गत मनोचिकित्सकीय प्रतिवेश (psychiatric setting) की व्यवस्था की गई है। मनोचिकित्सकीय समाज कार्य को परिभाषित करते हुए 1931 में Executive committee of the advisory on standards in USA ने लिखा है मनोचिकित्सकीय समाज कार्य समाज कार्य की ऐसी शाखा है, जिसने मनोचिकित्सा से संबंध विकसित किए हैं। यह मनोचिकित्सा के विशेष ज्ञान को ग्रहण किए एक प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा अभ्यास में लाया जाता है। इसने सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य अभ्यास को अपना लिया है, जिसका उपयोग किसी संस्थान में, जो समाज कार्य का एकत्रित भाग है, में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए किया जाता है।" आज मनोचिकित्सकीय समाज कार्य विभिन्न ज्ञानशाखाओं; मनोविज्ञान एवं मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान एवं समाजशास्त्र, मानसिक स्वच्छता और जनस्वास्थ्य एवं शिक्षण आदि क्षेत्रों को एकत्रित कर मानवीय संबंधों के सुधार में योगदान दे रहा है।
भारत में समाज कार्य विश्वकोश के अनुसार मानसिक बिमारों के साथ काम करते समय सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य का मुख्य उद्देश्य रोगी को समझते हुए उसमें बदलाव या परिवर्तन लाना है। यहाँ सामाजिक कार्यकर्ता अहम सहायक मापन, पर्यावरणीय परिवर्तन और अन्य सहायक थैरेपिज का उपयोग करता है। अवचेतन विचारों को बिना हाथ लगाए कार्यकर्ता अपनी कुशलता से सेवार्थी के अवचेतन मन को समझते हुए उसकी दशा और दिशा के आधार पर समस्या की सही गत्यात्मकता तक पहुंचता है।
इस उद्देश्य तक पहुँचने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता रोगी के साथ संबंध बनाते हुए रोगी की केस हिस्ट्री समझता है या उसे एकत्रित करता है और सेवाओं की समस्या और समस्या सदृश्य कारकों की खोज के बीच नियत अंतःक्रिया करता है। रोगी और उसके परिवार से प्राप्त नियत विकारविरूपण सामान होने के बाद प्राप्त जानकारी के आधार पर उसकी मनोगत्यात्मकता का पता लगाता है और मनोचिकित्सक के साथ मिलकर निदान को पूर्णता देता है। रोगी का निश्चित निदान एवं उपचार योजना के उद्देश्य से आयोजित चर्चाओं में मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सकीय नर्म एवं अन्य सह मनोचिकित्सकीय (Para-Psychiatric) कर्मियों के साथ सहभागी होता है। जब कभी सेवार्थों की प्रकृति में इंद्र आता है तब सामाजिक कार्यकर्ता उसके मनोवैज्ञानिक उपचार की पूरी जिम्मेदारी लेता है।
मनोसामाजिक कार्यकर्ता इस काम में सहायक मनोचिकित्सा, परामर्श तकनीक, पर्यावरण निर्माण आदि को उपयोग में लाता है साथ ही वैयक्तिक सेवा कार्य तकनीकों का उपयोग केवल बातचीत करने के लिए ही नहीं, बल्कि विभिन्न मुद्दों को विश्लेषित करने के उद्देश्य से करता है। सामाजिक कार्यकर्ता रोगी को भावनिक तनाव से मुक्ति में सहयोग प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में सामाजिक कार्यकर्ता रोगी के पारिवारिक सदस्यों को परामर्श के माध्यम से रोगी और उसकी बीमारी से संबंधित दृष्टिकोण समझाता है और उसे हल करने की प्रक्रिया में वे किस तरह बेहतर भागीदारी कर सकते हैं के बारे में बताता है। रोगी जब हॉस्पिटल से वापस परिवार में आता है तब वहाँ का वातावरण रोगी के अनुकूल बनाने के लिए पारिवारिक सदस्यों के तनाव को कम करने में उनकी मदद करता है जिससे रोगी जल्दी अपने परिवार में अन्य सदस्यों के साथ समायोजित हो सके।
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