चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय सेवाएं - Medical and Psychiatric Services
चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय सेवाएं - Medical and Psychiatric Services
सुदृढ शरीर ही व्यक्ति की वास्तविक संपत्ति होती है। इससे तात्पर्य है कि इस संपत्ति को प्राप्त करने के लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। अगर शरीर निरोगी नहीं है तो उसके लिए सारी सुविधाएँ निरर्थक होगी। व्यक्ति का शरीर जब कमज़ोर होता है तब मनुष्य अस्वस्थता का शिकार होता है, जिससे उसके स्वास्थ्य में तब्दिली आ जाती है। स्वास्थ्य केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिकता, सामाजिकता भी उसमें निहित होती है। व्यक्ति की स्वस्थता के लिए उसके आसपास का परिवेश उतना ही जरूरी है, जितना की उसकी मानसिकता।
एक स्वस्थ समाज के निर्मिति के लिए जरूरी है कि उस देश की जनसंख्या रोगमुक्त एवं सशक्त रहें। विज्ञान की प्रगति के आधार पर आज हम मानवीयय बीमारियों को अच्छी तरह से पहचान कर पा रहे हैं साथ ही उनका उपचार भी उपलब्ध है। किंतु अब इससे आगे बढ़ने का समय है। जैसा कि कहते है उपचार से रोकथाम अच्छा है" (Prevention Better than Cure) | इस जुमले की तरह आज चिकित्सा केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं रही है बल्कि वह रोगों के रोकथाम तक पहुंच गई है। बावजूदइसके विश्व की सभी जगहों पर एक समान स्थितियाँ नहीं होती। जहां एक ओर अवयव पुनस्थापना की बात हो रही है वहीं दूसरी ओर कोई केवल बुखार के कारण मृत्यु प्राप्त कर रहा है। इसलिए समानता के आधार पर ही चिकित्सा एवं मनोचिकित्सा सेवाओं का बंटवारा होना चाहिए और इस समानता को स्थापित करने के लिए आर्थिक स्वतंत्रता बहुत जरूरी है।
आर्थिक स्वतंत्रता
वह कारक है, जो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बनाने में मदद करता है। इस पूरे इकाई में हम भारतीय संदर्भ में चिकित्सा एवं मनोचिकित्सा सेवाओं पर बात करेंगे। स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए भारत जैसे समाज में विभिन्न प्रणालियां उपलब्ध है बावजूद इसके उन तक पहुँच समझ और उचित मार्गदर्शन के अभाव में आज भी जनसंख्या का एक बड़ा तबका वैद्य हकीम जैसे पारंपारिक प्रणालियों को अपनाने के लिए मजबूर है। साथ ही अस्वच्छ वातावरणपानी तथा सनिटेशन के अभाव में कईयों परिवार रोग-संसर्ग तथा महामारी का शिकार हो रहे थे व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य भी बहस का मुद्दा है।
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