मानसिक दृष्टि से मंदता - Mental Retardation

मानसिक दृष्टि से मंदता - mental retardation

मानसिक विशेष योग्यजन के अंतर्गत मंदबुद्धि बालक से लेकर जड़मति शामिल है। अपूर्ण मानसिक विकास और अवरुद्ध होने के कारण वे स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और न ही वे अपना जीविकापार्जन कर पाते हैं तथा उनमें परिपक्वता के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इसलिए वह दूसरे की सहायता एवं मार्गदर्शन पर अपना जीवन निर्भर करते हैं। मानसिक देरी (मंदता) को समझने के लिए विभन्न दृष्टिकोणों की आवश्यकता प्रतीत होती है। सामाजिक दृष्टिकोण के अनुसार यह बच्चे तथा व्यक्ति प्रारंभ से ही समाज तथा परिवेश से समायोजन नहीं कर पाते हैं, क्योंकि इनमें मानसिक दुर्बलता होती है अतः इसे मानसिक (मंदता) कहा जाता है। वैधानिक दृष्टिकोण से मानसिक दुर्बलता का अर्थ उस व्यक्ति से होता है, जिसको नैतिक-अनैतिक, उचित-अनुचित, सही-गलत आदि का कुछ भी ज्ञान नहीं होता है।

शिक्षा के क्षेत्र में, जो बच्चे दुर्बल पाए जाते हैं और सामान्य बच्चों के तुलना में कक्षा के स्तर के अनुसार विकास नहीं कर पाते हैं, उन्हें मानसिक देरी कहते हैं। बुद्धि के अभाव के कारण उसे किसी व्यवहार के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से जिस बच्चे की बुद्धिलब्धि 70 से कम होती है उसे मानसिक देरी माना जाता है। मानक बुद्धि परीक्षणअंकों पर आधारित निम्नलिखित श्रेणियां अमेरिकन एसोसियेशन ऑफ मेडिकन रिटार्डेशन, डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिकल मैन्युअल ऑफ मेंटल डिजआडर सIV-टीआर और इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजिजेज 10 पर आधारित है:


मानसिक मंदता 3 प्रकार के होते हैं:


* मूर्ख इनकी बुद्धिलब्धि 50 से 70 के बीच होती है यह मानसिक मंदता के पहली श्रेणी में आते है, अतः भेद करना भी कभी-कभी कठिन जाता है। ऐसे बच्चे का पढ़ने में मन नहीं लगता, समायोजन नहीं कर पाते, प्रत्येक विषय कठिन लगता है। 


• मूढ़ इनकी बुद्धिलब्धि 25 से 50 के बीच होती है। इनमें आत्म-नियंत्रण तथा आत्म-संयम की क्षमता नहीं होती है। ये किसी भी प्रकार की पढ़ने लिखने की क्षमता नहीं रखते है। जड़ इनकी बुद्धिलब्धि 25 से नीचे होती है। ऐसे बालक न तो सुनते हैं न ही देखने का प्रदर्शन  करते हैं। ये शारीरिक अंगों जैसे हाथ-पैर का भी प्रयोग नहीं करते। इनमें संवेदनशीलता का पूर्णतः अभाव पाया जाता है। मानसिक मंदता (देरी) के कारण मानसिक मंदता के प्रमुख दो कारण होते है।


मानसिक मंदता के प्रमुख दो कारण 


आंतरिक

  • जन्मगत

  • प्रजनन संबंधी



बाह्य



जन्मगत कारणों का संबंध अंग संरचना से होता है। अंग संरचना पर दबाव पड़ने के कारण मस्तिष्क का विकास बाधित हो जाता है। प्रजनन संबंधी कारणों में गर्भाधारण के समय स्त्री पुरुष का रोगी होना गर्भाशय में बालक के विकास में अवरोध गर्भ विकृति, स्त्रियों के गर्भाधारण के बाद मानसिक तनाव या शारीरिक दंड सहना आदि। जन्मजात कारणों में जुड़े अन्य कारण बालक के उत्पन्न होते समय घटित होते हैं, जैसे- जन्म के समय उचित देखभाल न होना मस्तिष्क पर चोट लग जाना या अन्य असावधानी का प्रभावा बाह्य कारणों में 


1) रोग और दुर्घटना


 2) मनोसामाजिक, सांस्कृतिक प्रभाव रोग और दुर्घटना


 गर्भावस्था से लेकर जीवनपर्यंत कभी भी घट सकती है। यह दुर्घटना की प्रकृति पर निर्भर है कि किस प्रकार की बाधा (मंदता) अर्जित होती है। प्राणवायु की क्षति शारीरिक ज्वर की तीव्रता भी मस्तिष्क में विकार पैदा कर देती है। कुछ दुर्घटनाएं किसी आयु में मस्तिष्क को असाधारण अवस्था में पहुंचा देती है। फलस्वरूप व्यक्ति में मानसिक मंदता आती है।


बालक पर गर्भ से ही बातावरण का प्रभाव पड़ने लगता है। जन्म के बाद वह सीधे समाज और संस्कृति के परिवेश में आ जाता है। परिवार का वातावरण तथा उनकी आर्थिक स्थिति भी बच्चों पर प्रभाव डालते हैं तथा कुपोषण का कुप्रभाव भी उन पर पड़ता है।


मनोवैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक प्रभाव भी मानसिक मंदता प्रदान करते हैं। भूतप्रेत कथाओं और भयावह रीति रिवाजों से भी मानसिक मंदता उत्पन्न हो सकती है। कुछ स्थितियों तथा अवस्थाओं में विषम व्यवहार, अनिर्णय की स्थिति उदासिनता आदि से जीवन में पूर्णरूपेण निराशा व्याप्त हो जाती है। वे प्रभाव भावात्मक रूप से कुसमायोजन का कारण होते हैं। रोजमर्रा के सामान्य व्यवहार भी कई अवसरों पर इतना आवेग उगल देते है कि व्यक्ति का स्पूर्ण मस्तिष्क ही नियंत्रण में नहीं रह पाता है वह असंतुलित हो जाता है। अंततः अवस्था विक्षिप्तावस्था में परिणत हो जाती है। मादक द्रव्यों के सेवन से तो मानसिक मंदता को बहुत बल मिलता है। अज्ञान और कामुकता भी मस्तिष्क की बहुत क्षति कर बैठते हैं।