राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग - National Commission for Scheduled Castes

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग - National Commission for Scheduled Castes

मूलतः संविधान का अनुच्छेद 338 अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति का उपबंध करता है जो अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के संवैधानिक संरक्षण से संबंधित सभी मामलों का निरीक्षण करें तथा उनसे संबंधित प्रतिवेदन राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करे। उसे अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयुक्त कहा जाएगा तथा उसे उक्त कार्य सौंपे जाएंगे1978 में, सरकार ने अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए एक गैरसंवैधानिक बहुसदस्यीय आयोग की स्थापना की। अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयुक्त का कार्यालय का भी निर्माण किया। 1987 में आयुक्त के कार्यों में संशोधन किया और आयोग का नाम बदलकर राष्ट्रीय अनु जाति एवं जनजाति आयोग कर दिया।

1990 के 65वें संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा एक विशेष अधिकारी के स्थान पर एक उच्च स्तरीय बहुसदस्यीय राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की स्थापना की गई। पुनः 2003 के 89वें संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा राष्ट्रीय आयोग का दो भागों में विभाजन कर दिया गया तथा राष्ट्रीय जाति आयोग एवं राष्ट्रीय जनजाति आयोग नामक नए आयोग बना दिए गए। यह 2004 वर्ष में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अस्तित्व में आया। आयोग में एक अध्यक्ष एक उपाध्यक्ष एवं तीन अन्य सदस्य हैं। वे राष्ट्रपति द्वारा उसके आदेश एवं मुहर लगे आदेश द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। उनकी सेवा शर्तें एवं कार्यकाल भी राष्ट्रपति द्वारा ही निर्धारित किए जाते हैं।