अन्य पिछड़ा वर्ग विकास कार्यक्रम - Other Backward Classes Development Program
अन्य पिछड़ा वर्ग विकास कार्यक्रम - Other Backward Classes Development Program
आर्थिक विकास
भर्ती के लिए रियायती मानक, आयु में छूट और प्रयासों की संख्या में वृद्धि सरकार ने 13 अक्तूबर, 1993 से अनुसूचित जाती एवं जनजाति उम्मीदवारों की तरह ही अन्य पिछड़े वर्गों को लिखित परीक्षा और साक्षात्कारों में रियायती मानक के लाभ प्रदान किए हैं। भारत सरकार ने 25 जनवरी 1995 को अनुदेश जारी किया है जिससे सीधी भर्ती में अन्य पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट तथा सिविल सेवा परीक्षाओं में अन्य पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों के लिए जो अन्यथा पात्र हैं, प्रयासों की संख्या सात वर्ष तक बढ़ा दी गई है। 1 जनवरी, 2005 तक केंद्र सरकार की सेवाओं में अन्य पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व निम्नलिखित है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग बित्त और विकास निगम: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त और विकास निगम आय अर्जन की विभिन्न गतिविधियों के लिए उन लोगों को ऋण सुविधाएं प्रदान करता है। जो गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले तथा जिनकी वार्षिक आय बी.पी.एल. वालों से दुगनी से कम है। इसमें महिला समृद्धि योजना को लागू करना भी शामिल है।31 मार्च 2012 तक निगम की 1000 करोड़ रुपए की अधिकृत पूंजी में से 672.80 करोड़ रुपए प्रदान की गई है। निगम से ऋण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर 139100 हो गई है। (भारत 2011)
शैक्षिक विकास
नौवीं योजना में अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याणार्थ कार्यान्वयनाधीन योजनाएं पिछड़े समुदाय के सामाजिक तथा आर्थिक स्तर में सुधार लाने तथा विशेष कोचिंग कार्यक्रमों के माध्यम से सुनिश्चित करने के लिए छात्रावास सुविधाओं सहित मैट्रिक पूर्व और मैट्रिकोत्तर एवं साथ ही अन्य उच्च शिक्षा का अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति देने हेतु भारत सरकार द्वारा नौवीं योजना शुरू की गई। इनका समीक्षात्मक दृष्टि से मूल्यांकन एवं संशोधन किया जा रहा है ताकि अन्य पिछड़े वर्ग के प्रतिभावान उम्मीदवारों का उच्चत्तर एवं व्यावसायिक संस्थाओं में प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके।
अन्य पिछड़े वर्गों के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति की योजना का उद्देश्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में मेंट्रक-पूर्व चरण पर अध्ययन करने वाले अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को प्रेरणा प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत उस छात्रों को छात्रवृत्ति मंजूर की जाती है, जिसके माता-पिता अभिभावकों की सभी स्रोतों से आय प्रति वर्ष 44,500 रुपए से अधिक न हो। यह छात्रवृत्ति उन संस्थाओं में तथा उन मैट्रिकपूर्व पाठ्यक्रमों के लिए तर्कसंगत है जिन्हें संबंधित राज्य सरकार तथा संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन द्वारा विधिवत मान्यता प्रदान की जाती है।
अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों को भारत में अध्ययन के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्तिः इस योजना का उद्देश मैट्रिकोत्तर अथवा पोस्ट सैकंडरी स्तर पर अध्ययनरत अन्य पिछड़े वर्ग के निर्धन छात्रों को अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके उनके उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। ये छात्रवृत्तियाँ भारत में अध्ययन के लिए ही उपलब्ध होंगी और राज्य सरकार संघ राज्य क्षेत्र द्वारा प्रदान की जाएंगी जिनसे आवेदक वास्तविक रूप से संबंधित है। इस उद्देश्य के लिए राज्य सरकारों संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों को उनकी प्रतिबद्ध देयता के अलावा 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती हैं। अन्य पिछड़े वर्गों के लड़कों और लड़कियों के लिए होस्टल: इस योजना का उद्देश्य केंद्रीय/राज्य/संघ क्षेत्र प्रशासन की पिछड़े वर्गों की सूचियों के रूप में अधिसूचित तथा समान्यतः अन्य पिछड़े वर्गों के रूप में उल्लिखित सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत क्रीमीलेयर को शामिल नहीं किया जाएगा। होस्टल निर्माण के लिए राज्यों को 50 प्रतिशत केंद्रीय सहायता एवं संघ राज्य क्षेत्रों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इन होस्टलों का निर्माण मिडिल, सैकेंडरी कालेज तथा विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों के लिए किया जाता है। इन होस्टलों में से एक तिहाई लड़कियों के लिए होते हैं। पांच प्रतिशत सीटें विकलांग छात्रों के लिए होस्टलों में आरक्षित होते हैं।
अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए स्वेच्छिक संगठनों को सहायतः इस योजना का उद्देश्य स्वैच्छिक क्षेत्र की सहायता से अन्य पिछड़े वर्गों की शैक्षिक और आर्थिक सामाजिक स्थिति सुधारने का प्रयास करना है, जिससे वे आय बढ़ाने के लिए अपना काम-धंधा शुरू कर सकें और लाभप्रद रोजगार प्राप्त कर सके। इस योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्र खोलने के लिए स्वीकृत खर्च का 90 प्रतिशत अनुदान के रूप में गैर-सरकारी संगठन को दिया जाता है। इन प्रशिक्षण केंद्रों में बढ़ईगिरी कंप्यूटर, दस्तकारी, इलेक्ट्रिशियन, मोटर मैकेनिक, फोटोग्राफ, मुद्रण, कंपोजिंग बुक बाइंडिंग टाइप और बेल्डिंग, फिटिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।
अन्य पिछड़े वर्ग के विकास के मूलभूत पक्षों पर चर्चा की। उनका सामाजिक स्तर विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत निम्न है शैक्षिक एवं आर्थिक तौर पर वे अन्य उच्च जातियों की तुलना में पीछे हैं। हमने यह भी देखा है किअन्य पिछड़े वर्ग के विकास के लिए गठित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग किस तरह से उनके विकास में सहयोग प्रदान करता है। इस इकाई में हमने आयोग के कार्य एवं संचालन का सिंहावलोकन भी किया है। इसी के साथ पिछड़े वर्ग के आर्थिक और शैक्षिक विकास की योजनाओं की भी चर्चा इसमें की गई है।
भारत में अन्य पिछड़ा वर्ग की अवधारणा में काफ़ी विभिन्नता दिखाई देती है। हर बार अलग अलग में कमिटियों ने इस वर्ग को अपनी से परिभाषित तथा परिसीमित करने कार्य किया है। इन सबके बावजूद जमीनी धरातल पर ओबीसी के नाम से जाना जाने वाला यह वर्ग जिसमें विभिन्न जातियाँ शामिल है, खुद को मध्यवर्ग के रूप में देखता है। इसमें बदलाव न के बराबर चलते हैं किंतु इनकी संवैधानिक तथा सामाजिक स्थिति दोनों में भिन्नता दिखती है क्योंकि भले ही सामाजिक रूप से स्वयं को दलितों से ऊपर मानने वाला यह वर्ग संवैधानिक स्थिति में आरक्षण की मांग करता नजर आता है। इसपर आज भी इस मुद्दे को लेकर कई सारे आंदोलन चल रहे हैं कि ओबीसी को आरक्षणजरूरी है कि नहीं या इस वर्ग को आर्थिक तर्ज पर आरक्षण देना चाहिए। कई तरह के विवादों के गिरफ्त में वह अन्य पिछड़ा वर्ग दलितों और द्विज जातियों से अलग अपना अस्तित्व बनाए रखने की लगातार कोशिश करता है।
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