शारीरिक व अन्य प्रकार के विशेष योग्यजन - Physical and Other Special Abilities

शारीरिक व अन्य प्रकार के विशेष योग्यजन - Physical and Other Special Abilities

शारीरिक दृष्टि से बधित व्यक्ति उसे कहते हैं, जिसके शारीरिक अंग की कार्य करने की क्षमता किसी बीमारियों या दुर्घटनाओं के कारण क्षीण हो जाती है। साथ ही जिनका उपचार होने पर भी शारीरिक अंग में कार्य करने की अक्षमता स्थायी रूप से विद्यमान होती है। ऐसे व्यक्तियों का सामंजस्य वास्तव में उनके में जीवन की एक महत्वपूर्ण समस्या बन जाती है। बाधाओं के स्थायी रूप के कारण जीवन के प्रति वे असंतुष्ट और निराश हो जाते हैं क्योंकि वे विभिन्न प्रकार की मानसिक विषमताओं का शिकारहोते हैं। इसलिए वे निराशावादी मनोवृत्ति को अपनाते हैं। उनके उपचार और पुर्नवसन की प्रक्रिया ऐसी विस्तृत और व्यापक होनी चाहिए, जिसमें उनके उपयुक्त सामंजस्य प्राप्त हो सके।


शरीरिक असमर्थता दो प्रकार की होती है. 


1) मस्तिष्क यंत्रों को प्रभावित करने वाली


2) मांसपेशियों व हड्डियों को प्रभावित करने वाली शारीरिक व अन्य प्रकार की विशेष योग्यता के कारण शारीरिक बाधाओं के कारणों को तीन श्रेणिओं में देखा जाता है।


1) अनुवाशिक बाधाएं जैसे जन्मजात बालक जो माता-पिता से हस्तांतरित विकृति के साथ पैदा होता है।


2) ऐसी चोट एवं दुर्घटनाएं जिनके कारण हड्डी टू जाती है जोड़ हट जाते हैं और कभी-कभी शरीर के किसी अंग को काटना पड़ता है।

3) बीमारिया के कारण शारीरिक अंग का क्षीण होना जैसे पोलियो, लकवा, क्षयरोग, कुष्ठरोग, बातरोग आदि।


इन बीमारियों और बाधाओं से पीड़ित व्यक्तियों की सहायता का मुख्य उद्देश्य उनको है। पुनर्वास का तात्पर्य वास्तव में उस उपचार पद्धति से है जो बाधित व्यक्तियों को उनकी पूर्ण शरीरिक, पुनर्वास धान करना सामाजिक, व्यवसायिक और आर्थिक क्षमता को पुनर्वसित कर सके। आधुनिक चिकित्सा और उपचार की विधिया इस उद्देश्य की प्रप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा ही है।